यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 26, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कानून के शस्त्र से तोड़ेंगे अपराधियों की कमर : एसपी
- रणनीति - थानों में आने वाले हर व्यक्ति को मिलेगा सम्मान - गरीब और कमजोर वर्ग की पहले क

- रणनीति
- थानों में आने वाले हर व्यक्ति को मिलेगा सम्मान
- गरीब और कमजोर वर्ग की पहले की जाएगी मदद जागरण संवाददाता, आजमगढ़ : नवागत पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद मीडिया कर्मियों से बातचीत में साफ-सुथरी पुलिसिग को अपनी प्राथमिकता बताई। कहा कि उस व्यक्ति की पहले मदद की जाएगी जो गरीब हो और उसके लिए कोई पैरवी करने वाला न हो।थानों में पहुंचने वालों को पूरा सम्मान दिया जाएगा। पुलिस अपराधियों को सबक सिखाने के लिए कानून के शस्त्र का प्रयोग करेगी।
उन्होंने कहा कि केवल अपराध के मामले में ही नहीं, बल्कि थाने में पहुंचे कोई बीमार भी मदद मांगता है, तो उसे पुलिस की जीप से अस्पताल पहुंचाया जाएगा। थानों में जाने वालों के साथ पुलिस का व्यवहार बेहतर होना चाहिए। अगर कोई पिटकर आया है तो एनसीआर नहीं, बल्कि एफआइआर दर्ज की जाएगी। महिला उत्पीड़न के मामले में त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
एसपी ने बताया कि छेड़खानी की घटना पर विराम लगाने के लिए आते ही सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक सड़कों पर फर्राटा भरने वाले बिना हेलमेट लगाए युवाओं के खिलाफ अभियान शुरू कराया है।बड़े अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ पैदा किया जाएगा। उसकी आर्थिक कमर तोड़ने के लिए कानून के सभी शस्त्रों का प्रयोग किया जाएगा।यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए नगर पालिका समेत सभी जिम्मेदारों से सहयोग लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि हम यह भी देखेंगे कि किस थाना क्षेत्र से ज्यादा फरियाद मेरे पास आ रहे हैं। जिस थाना क्षेत्र से ज्यादा लोग आएंगे उसके बारे में माना जाएगा कि वहां के प्रभारी की जनसुनवाई में रुचि नहीं है।पुलिस की छवि खराब करने वालों को दंडित करने के साथ अच्छा काम करने वालों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
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जनता के लिए जारी करेंगे हेल्पलाइन नंबर
आजमगढ़ : एसपी ने बताया कि बेहतर पुलिसिग की महत्वपूर्ण कड़ी जनता है। हम उससे सीधे जुड़ने और सूचनाएं प्राप्त करने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करेंगे। जनता उसी नंबर पर वह अपनी परेशानी और अपराधों की सूचना साझा कर सकेगी। अपराधियों के बारे में सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। पुलिसकर्मियों की समस्या जानने के लिए एक नंबर जारी किया जाएगा। तमाम पुलिस वाले ऐसे हैं जो अपनी समस्या हम तक नहीं पहुंचा पाते और तनाव से गुजरते हैं। जाहिर सी बात है कि पुलिसकर्मी तनाव में रहकर बेहतर सेवा नहीं दे पाएंगे।
