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यूपी में अब पुराने ईंट-भट्ठों को मिल सकेगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सहमति सर्टिफिकेट, रिकॉर्ड में भी होंगे दर्ज

Published: Sat, 19 Sep 2026 10:03 PM (IST)

उत्तर प्रदेश में पुराने ईंट-भट्ठों को अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सहमति प्रमाण पत्र मिल सकेगा, जिसके लिए उन्हें 27 ...और पढ़ें

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. पुराने ईंट-भट्ठों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सहमति मिलेगी।

  2. 27 जून 2012 से पूर्व संचालन का प्रमाण देना होगा।

  3. निर्धारित शुल्क का तीन गुना जमा करना अनिवार्य होगा।

जागरण संवाददाता, आजमगढ़। अब पुराने ईंट-भट्ठों को भी संचालित कराने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सहमति प्रमाण पत्र मिल सकेगा। इसके लिए ईंट-भट्ठा संचालकों को 27 जून 2012 के पूर्व से भट्ठा संचालित है, इसका प्रमाण दिखाना होगा।

इसके साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय में उस समय से लेकर अब तक निर्धारित शुल्क का तीन गुना शुल्क जमा करना होगा। अगर कोई ईंट-भट्ठा संचालक बिना लाइसेंस के इसे संचालित कर रहा है तो अब अभियान चलाकर ऐसे भट्ठों को बंद कराया जाएगा।

इसके लिए शासन से स्पष्ट गाइड लाइन भी जारी हो चुकी है। अब 27 जून 2012 के पूर्व के भट्ठा संचालकों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सहमति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

उक्त अवधि में संचालित ईट-भट्टा संचालकों को खनन विभाग में जमा रायल्टी का प्रपत्र या फिर जिला पंचायत या टीन नंबर और वैट नंबर में से किसी दो अभिलेखों को दिखाना होगा।

इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उसकी जांच कराने के बाद ईंट-भट्ठा संचालकों से उक्त अवधि से वर्तमान अवधि तक निर्धारित फीस का तीन गुना जमा कराने के बाद ही सहमति प्रमाण पत्र जारी करेगा।

सहमति प्रमाण पत्र लिए बिना संचालित होने वाले ईंट-भट्ठों को बंद कराने के साथ ही उनके संचालकों से जुर्माने की राशि भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग वसूल करेगा।

दस ईंट-भट्ठा संचालकों ने लिया सहमति प्रमाण पत्र

जिले में 27 जून 2012 के पूर्व से संचालित दस ईंट-भट्ठा के संचालकों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में जरूरी दस्तावेज और शुल्क जमा करने के बाद सहमति प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया है। इसके साथ ही 15 संचालकों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में आवेदन भी किया है।

ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए तीन फरवरी 2026 को नई गाइड लाइन जारी हुई है, उसी के बाद से अब पूर्व के भट्ठा संचालकों को सहमति प्रमाण पत्र लेना आवश्यक है। इसे लेकर कुछ दिन पूर्व ईंट-भट्ठा समिति और कुछ संचालकों के साथ बैठक की गई थी, ताकि वे अन्य संचालकों को भी इसके बारे में बता सकें। -प्रदीप कुमार विश्वकर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।