आजमगढ़ : बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार पांडेय द्वारा फर्जी अंक पत्र लगाकर नौकरी कर रहे तीन शिक्षकों के खिलाफ मंगलवार की देर रात की गई बर्खास्तगी के बाद दो और फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। अब तक चार फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। दोषी दो और शिक्षकों का साक्ष्य जुटाने में बेसिक शिक्षा अधिकारी जुट गए हैं। इन लोगों ने आगरा, महाराष्ट्र, हरियाणा सहित विभिन्न प्रांतों की फर्जी डिग्री लगाई है।

बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र पांडेय द्वारा कुछ दिन पूर्व की गई जांच के बाद यह पुष्ट हो गया था कि छोटेलाल फर्जी शिक्षक हैं। गांधी पीजी कालेज मालटारी पर शिक्षक छोटेलाल के स्नातक की डिग्री की जांच करने बीएसए गए भी थे। यहां स्पष्ट हो गया था कि गजट में हेर-फेर किया गया है। ऐसे में गोरखपुर विश्वविद्यालय से गजट की फोटोकॉपी मंगाई गई, तब जाकर उसके विरुद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई हुई। इसके अलावा यादव ऊषा व सीमा पुत्री नंदलाल ने बीटीसी का फर्जी अंक पत्र लगाया था। इन्हें भी बर्खास्त किया गया है। इसके पूर्व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का फर्जी अंक पत्र लगाने वाले रवि राय की सेवा समाप्त की जा चुकी है। बता दें कि वर्ष 2016 में बीएसए कार्यालय द्वारा 15000 व 16448 शिक्षक भर्ती निकली थी। इसमें 15000 शिक्षक भर्ती में मेरिट कम होने की वजह से तमाम शिक्षक नियुक्ति पाने से वंचित हो गए। इसके बाद सैकड़ों अभ्यर्थियों ने विकलांग प्रमाण पत्र व फर्जी अंक पत्र के आधार पर 16448 शिक्षक भर्ती में आवेदन कर दिया था। इसमें उनका चयन हो गया था। विभिन्न स्कूलों में शिक्षक तैनात होकर भारी भरकम वेतन भी उठा रहे थे। प्रथमदृष्टया जांच में फर्जी अंक पत्र के आधार पर नियुक्ति पाए सैकड़ों प्राथमिक शिक्षकों को भी चिह्नित कर लिए गए थे। यही नहीं कु. शिवमुनि यादव पुत्री बसंत यादव, ऊषा पुत्री रामनिवास, प्रभाकर मिश्रा पुत्र श्रीनाथ मिश्रा, छोटेलाल पुत्र बलिकरन व रमेश पुत्र मिट्ठू यादव के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश भी हो गया था। इस बीच मामला हाईकोर्ट में चला गया था। बाद में हाईकोर्ट ने गेंद बीएसए के पाले में डाल दी और जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। बीएसए द्वारा लगातार चार शिक्षकों रवि राय, छोटेलाल, सीमा व यादव उषा के खिलाफ कार्रवाई कर बर्खास्त कर दिया गया है। अब कु. शिवमुनि यादव व प्रभाकर मिश्रा के विरुद्ध कार्रवाई होनी है। इनके ऊपर कार्रवाई की तलवार किसी भी समय चल सकती है। इससे शिक्षा जगत में हड़कंप है।

Posted By: Jagran