जागरण संवाददाता, आजमगढ़ : संक्रमण का प्रसार रोकने के मकसद से कई राज्यों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं। ज्यादातर बच्चे पूरे दिन घरों में ही रह रहे हैं। ऐसे में यह ध्यान रखने की जरूरत है कि बच्चों के मन में कोई दीर्घकालीन डर न बैठ जाए। अपने घर में कोरोना के बारे में बात करते हुए सावधानी बरतें। खुद को सकारात्मक रख बच्चों को जागरूक करें। इसके बारे में सहजता से समझाएं। डिप्टी सीएमओ डा. एके सिंह ने बच्चों की मॉनिटरिग उनके सवालों का जवाब एवं कोरोना वायरस पर चर्च करने की सलाह दी।

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बच्चों में ये आदतें डालें

-20 सेकंड तक हाथ धुलने की आदत डालें।

-छींक या खांसी पर रूमाल का इस्तेमाल सिखाएं।

-मुंह पर हाथ रखने की जगह बांह का प्रयोग

-बच्चे हैंड सैनिटाइजर का सावधानी से प्रयोग करें।

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डराना नहीं, समझाना है-

-घर में या फोन पर किसी वयस्क या बच्चे से कोरोना पर बात करते हुए खुद को शांत और सकारात्मक रखें।

-बच्चे आपकी बातों और कहने के ढंग पर गौर करते हैं, अगर आप चिता करेंगे, डरेंगे तो वे सहम जाएंगे।

-कोरोना को लेकर बच्चों की उत्सुकता को समझें और उनके सवालों को टालने की जगह ध्यान से सुनें।

-वायरस के लिए किसी समुदाय या देश को दोष देने वाली भाषा का इस्तेमाल बच्चों के सामने न करें।

-इस बात पर ध्यान दें कि वायरस के संबंध में बच्चे टीवी, रेडियो, मोबाइल या इंटरनेट पर क्या देख रहे हैं।

-वायरस से जुड़ी खबरें टीवी या इंटरनेट पर देखने की सीमा तय करें, एक विषय पर ज्यादा पढ़ने से फीक्र बढ़ेगी।

-ध्यान रखें कि यह वायरस किसी को भी हो सकता है इसलिए बच्चों के सामने किसी के बारे में पूर्वागृह न बनाएं।

-बच्चों को वायरस से जुड़ी तथ्यपरक जानकारी ही दें, उनकी उम्र के हिसाब से ही उन्हें खबरें बताएं।

-बच्चों को सतर्क करते रहें कि वे इंटरनेट पर जो भी पढ़ रहे हैं, वह फर्जी भी हो सकता है।

-बच्चों को ये जरूर बताएं कि इस कोरोना वायरस से उनको बहुत कम खतरा है।

Edited By: Jagran