जासं, आजमगढ़ : विवेकानंद केंद्र कन्या कुमारी शाखा लखनऊ द्वारा विश्व धर्म महासभा शिकागो में 11 सितंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद द्वारा दिए गए प्रथम उद्बोधन के संदर्भ में शनिवार को शिब्ली नेशनल महाविद्यालय में भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई।

कार्यक्रम की संयोजिका संस्कृत विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डा. शाहीन जाफरी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति सभ्यता से विदेशों को अवगत कराया। अपने संबोधन में अमेरिकावासी बहनों तथा भाइयों कहने पर वहां के लोगों ने खड़े होकर तालियों से स्वामी विवेकानंद का स्वागत किया। मुख्य अतिथि हिदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. आलमगीर ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का विचार वर्तमान समय में अत्याधिक प्रासंगिक है। अगर इनके विचारों को अनुसरण किया जाए तो हमें विश्व गुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता। दर्शनशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डा. वीके सिंह ने कहा कि विवेक का आनंद यानि विवेकानंद अपने अंदर सारे तत्वों को समाहित कर पूरे विश्व के लिए मानवता का संदेश देते हुए मन को वश में करने तथा व्यक्ति के अंदर निहित क्षमताओं को उजागर करने की शिक्षा देना चाहते थे। कार्यक्रम में उर्दू विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. ताहिर हिदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डा. फिरोजा बानो, डा. अरुण कुमार यादव, प्रियंका साहू, वंदना यादव, ज्योति दीक्षित, जयश्री शर्मा, शिखा रावत, प्रगति चतुर्वेदी, राम विनय यादव, कीर्ति चौबे आदि प्रतिभागियों ने स्वामी विवेकानंद के प्रथम उद्बोधन पर पर प्रकाश डाला।

Posted By: Jagran

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