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एसएसपी आजमगढ़ के जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार सिंह को शाम पांच बजे तक न्यायिक अभिरक्षा का आदेश

By Saurabh Singh Edited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 13 Oct 2026 06:00 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अश्लील वीडियो प्रसारित करने के आरोपी सचिन यादव की जमानत अर्जी खारिज कर दी। साथ ही, ...और पढ़ें

आजमगढ़ पीआरओ राजेश कुमार सिंह को हाईकोर्ट ने भेजा न्यायिक अभिरक्षा में, सचिन यादव की जमानत खारिज।

आजमगढ़ पीआरओ राजेश कुमार सिंह को हाईकोर्ट ने भेजा न्यायिक अभिरक्षा में, सचिन यादव की जमानत खारिज।

HighLights

  1. पीआरओ राजेश कुमार सिंह को न्यायिक अभिरक्षा में रखने का आदेश।

  2. अश्लील वीडियो मामले में सचिन यादव की जमानत खारिज।

  3. सरकारी अधिवक्ता से दुर्व्यवहार पर हाईकोर्ट का सख्त रुख।

जागरण संवाददाता, आजमगढ़ : महराजगंज थाना क्षेत्र में युवती का अश्लील वीडियो और फोटो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करने के आरोपित सचिन यादव की जमानत अर्जी इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज कर दी।

सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता अनुराग पांडेय से दुर्व्यवहार के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आजमगढ़ के एसएसपी के जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार सिंह को शाम पांच बजे तक न्यायिक अभिरक्षा में रखने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने पुलिस महानिदेशक को सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों के लिए निर्देश जारी करने को कहा।

सुनवाई के दौरान एसएसपी डा. अनिल कुमार द्वितीय और पीआरओ राजेश कुमार सिंह अदालत में उपस्थित हुए। एसएसपी ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में हुई चूक पर खेद जताया। उन्होंने बताया कि संबंधित पुलिसकर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

वहीं, पीआरओ को पद से हटाकर उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की गई है। अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए सूचना देने वाले राज्य विधि अधिकारियों से किसी भी पुलिस अधिकारी का दुर्व्यवहार गंभीर मामला है।

साइबर सेल की रिपोर्ट पर जमानत खारिज 

मुकदमे के अनुसार, आरोपित ने शादी तय होने के बाद युवती का अश्लील वीडियो और फोटो तैयार कर उसे दो लाख रुपये के लिए ब्लैकमेल किया। रुपये नहीं देने पर राकेश यादव के नाम से बनाई गई फर्जी आइडी से वीडियो और फोटो प्रसारित करने का आरोप है। बचाव पक्ष ने आरोपित को निर्दोष बताते हुए जमानत की मांग की, जबकि अभियोजन पक्ष ने पेन ड्राइव और साइबर सेल की रिपोर्ट का हवाला देकर इसका विरोध किया। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जमानत देने से इन्कार कर दिया।