जासं, बिद्राबाजार (आजमगढ़) : अयोध्या में श्रीराम के राजतिलक की तैयारियां जोरों पर चल रही थीं। पूरी अयोध्या में खुशी का माहौल था लेकिन ऐन वक्त पर अयोध्या के राजा दशरथ से जब रानी कैकेयी ने अपने वरदान मांगे तो राम को वन जाना तय हो गया। बिद्राबाजार में आयोजित रामलीला में कैकेयी अपनी मांग को लेकर कोप भवन में चली गईं। दशरथ जब उन्हें मनाने जाते हैं तो वह युद्ध के समय दशरथ द्वारा दिए गए वचन को याद दिलाती हैं। राम को जब पता चलता है तो वे पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वन जाने की तैयारी शुरू करते हैं। पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण भी उनके साथ जाने की जिद करने लगते हैं। राम अपने अनुज व पत्नी को लेकर वन की तरफ प्रस्थान कर जाते हैं। यह देख अयोध्यावासी रो पड़े। उन्हें रोकने की कोशिश भी होती है पर राम नहीं मानते। मंचन के दौरान रामलीला समित के अध्यक्ष रूपनरायन उपाध्याय, राधेश्याम, मुन्ना शर्मा, श्रीप्रकाश मोदनवाल, राजेंद्र हलवाई, भैरव गुप्ता व दिनेश प्रजापति आदि उपस्थित थे।

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श्रीराम को साधु रूप में मिले हनुमान

जासं, रौनापार (आजमगढ़) : सगड़ी तहसील क्षेत्र के अजगरा मसर्की (नैनीजोर) के हनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजित रामलीला में बुधवार की रात श्रीराम का हनुमान को मिलन, बाली वध और मेघनाथ वध का मंचन हुआ। सीता हरण के बाद विलाप कर रहे श्रीराम को साधु के रूप में हनुमान मिलते हैं। इसके बाद श्रीराम ऋषिकूट पर्वत पर पहुंचते हैं, जहां उनकी सुग्रीव से मुलाकात होती है। श्रीराम सुग्रीव को सीता हरण की जानकारी देते हैं। मित्रता के बाद श्रीराम छिपकर बाली का वध कर देते हैं। जामवंत के कहने पर हनुमान लंका जाते हैं और रावण के सोने की लंका को जला देते हैं। वहीं रावण की सभा से उपेक्षित विभीषण प्रभु श्रीराम की शरण में जाते हैं जहां विभीषण का जलाभिषेक करते हैं और युद्ध की शुरुआत कर देते हैं। लक्ष्मण को मूर्छा आ जाती है तो हनुमान संजीवनी ले आते हैं। राम का किरदार गोलू सिंह, लक्ष्मण का आशीष गुप्ता, अंगद का रामप्रताप सिंह व रावण का रोल सुधाकर सिंह ने निभाया। इस अवसर पर योगेंद्र सिंह, रामनरायन सिंह उर्फ कलाऊ सिंह आदि उपस्थित थे।

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श्रीराम ने किया बाली का वध

जासं, मेंहनगर (आजमगढ़) : श्री रामलीला कमेटी मेंहनगर द्वारा श्रीराम-सुग्रीव मित्रता और बाली वध का मंचन किया गया। इसमें भगवान राम और लक्ष्मण माता सीता को तलाशने वनों में घूमते हैं। इस दौरान उनकी भेंट शबरी से होती है, जो भगवान राम का दर्शन कर अपने को धन्य समझती हैं। शबरी उन्हें किसकिधा नरेश सुग्रीव के पास भेजती हैं। श्रीराम व लक्ष्मण सुग्रीव के यहां पहुंचते हैं। सुग्रीव के सेनापति हनुमान जी भगवान राम से आने का कारण पूछते हैं, तब रामचंद्र जी बताते हैं कि हम वनों में वनवास के लिए आए हुए थे। यहां पर हमारी धर्मपत्नी सीता का हरण हो गया है। यह सुनकर हनुमान जी कहते हैं कि लंकापति रावण एक नारी को उठाकर ले जा रहा था। वहीं, हनुमान जी सुग्रीव से राम-लखन को मिलवाते हैं। इस बीच राम और सुग्रीव के बीच मित्रता होती है। रामचंद्र सुग्रीव को सारी बात बताते हैं और सुग्रीव भी भाई बाली के कृत्यों से परेशान होना बताते हैं। इस पर राम जी सुग्रीव को बाली से लड़ने के लिए कहते हैं। सुग्रीव व बाली के बीच घमासान युद्ध होता है, जिसमें रामचंद्र जी अपने बाण से बाली का वध कर देते हैं।

कलाकारों के जीवंत मंचन को देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। राम वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण

जासं, सरायमीर (आजमगढ़) : रामलीला समिति पवई लाडपुर के तत्वावधान में मंगलवार की रात रामलीला मंचन में राम वनवास और भरत राजगद्दी व पुत्र वियोग में राजा दशरथ की मृत्यु का मंचन किया गया। इस दौरान कैकेयी राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगती है। राजा दशरथ विवश होकर राम को वनवास व भरत को राजगद्दी दिया गया। दशरथ ने श्रवण के माता-पिता द्वारा दिए गए श्राप को याद किया। भगवान राम अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन कोचल दिए। अपने पुत्रों के वियोग में राजा दशरथ ने अपने प्राण त्याग दिए। इस अवसर पर पंकज सिंह, श्रीनाथ प्रजापति, अनुपम पांडेय, गुलशन प्रजापति, शैलेश प्रजापति, डा. अजय कुमार पांडेय व संदीप आदि उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

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