जासं, सरायमीर (आजमगढ़) : मुफ्ती मोहम्मद आजम कासमी का कहना है कि खुदा ताला की सर्वश्रेष्ठ नेमतों में से एक रमजान मुबारक है। जबकि अल्लाह के फजल से हम रोजा, नमाज, तरावीह, तहजूद, •िाक्र व तिलावत के साथ अल्लाह रब्बुल इ•ा्•ात की हमद व सना करते हुए पहला अशरा रहमत का पलक झपकते ही हमसे विदा हो गया। आज जरूरत है कि हम अपने गुजरे हुए दिनों का जायजा लें कि अल्लाह की महान नेमत मिलने के बाद क्या हमने इसकी कदर की। इन पवित्र रातों के पाने के बाद क्या हम अल्लाह की कृपा के हकदार हैं। इन पवित्र दिनों के रोजे को रखकर रोजा की रूह खैर, नेकी, झूठ, गीबत, हसद, नफरत, अदावत से जीवन का पवित्र होना हमारे जीवन में पैदा हुई। अगर इन चीजों को हम अपने जीवन में पाएं तो यकीनन पवित्र रमजान की बरकत के कारण यह हमारे जीवन में परिवर्तन लाता है। इस पर हमें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए। यदि हमारा जीवन इन सब चीजों से दूर है। इन पवित्र माह रमजान के दिनों के मिलने के बाद भी हम अल्लाह की कृपा से दूर आवश्यक और अति आवश्यक कार्य को छोड़ना, गुनाह का काम हमारे जीवन का भाग बना रहना हमारे जीवन में मौजूद है।

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Posted By: Jagran

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