जयप्रकाश निषाद, आजमगढ़

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आयुष्मान लाभार्थियों की सेहत और स्वास्थ्य विभाग की ओर से मिलने वाली तमाम सुविधाओं की जानकारी अब मोबाइल के माध्यम से संगिनी व आशा देंगी। यही नहीं गांव में किसी महिला व गर्भवती की हालत गंभीर है, गांव में कोई संक्रामक रोग फैला है, इन सबकी जानकारी भी मोबाइल फोन से अपने अफसरों व विभाग को देंगी। विभाग तुरंत इसे संज्ञान में लेकर कदम उठाएगा। जनपद की 423 आशा बहुएं व संगिनी स्मार्ट फोन से जल्द ही लैस हो जाएंगी। इसके लिए शासन की तरफ से हरी झंडी दे दी गई है। जल्द ही इसकी खेप स्वास्थ्य महकमे तक पहुंचने वाली है।

मोबाइल मिलने के बाद वह आयुष्मान व अन्य मरीजों की जहां स्क्रीनिग करेंगी वहीं हमेशा अपडेट रहेगी। इसके अलावा सेंटर पर उन लोगों को भी प्राथमिक उपचार सहित जांच की सुविधा निश्शुल्क मिलेगी, जिनका नाम आयुष्मान योजना में नहीं है। कितने लोगों को आयुष्मान योजना का लाभ लिया है, कितने लोग इसका लाभ उठाना चाहते हैं, इन सबका ब्योरा मोबाइल फोन पर अनवरत उपलब्ध रहेगा। इसकी मानीटरिग भी स्वास्थ्य महकमा हमेशा करता रहेगा। पहले चरण में केवल पल्हनी, बिलरियागंज, सठियांव व अजमतगढ़ की आशा व संगिनी को इसका लाभ मिलेगा। योजना का बेहतर परिणाम मिलने पर अन्य ब्लाकों की आशा व संगिनी को स्मार्टफोन दिया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के पीसीपीएम विपुल बिहारी पाठक के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन लखनऊ ने इससे पूर्व सभी जिलों के सीएमओ को अपने जिले की आशा व संगिनी की संख्या देने का निर्देश दिए थे। इस आधार पर स्वास्थ्य विभाग जनपद की आशा व संगिनी की सूची बनाकर ब्लाकवार शासन को भेजा था। जनपद में जिला अस्पताल सहित कुल 109 स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसमें 10 प्राथमिक व 19 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके अलावा 69 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र पर हैं। यहां पर कुल 3630 आशा बहुएं हैं। आशा संगिनी का कुल 199 पद हैं। यहां पर कुल 143 आशा संगिनी तैनात है। अभी 56 का पद रिक्त चल रहा है। प्रथम चरण में 224 आशा व 143 संगिनी को लाभान्वित किया जाएगा। यह आशा व संगिनी अपने नजदीकी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के साथ ही अपने क्षेत्र के लोगों को सेहत की जानकारी लेकर स्मार्टफोन पर अपडेट करेंगी। स्मार्टफोन में आयुष्मान से जुड़ा एप भी होगा। इसमें समय-समय पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े सर्वे भी कराएं जाएंगे और उनका अपडेट स्मार्ट फोन के जरिए रोज देना होगा। ''स्मार्टफोन मिलने के बाद पहले चरण में आशा बहुओं का काम आयुष्मान लाभार्थियों का सी-बैक फोल्डर बनाना होगा। इसके तहत आयुष्मान लाभार्थी परिवार में 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की हाइपरटेंशन और डायबिटीज और इसके बाद महिलाओं से संबंधित बीमारियों की जांच की जाएगी।''

-डा. एके मिश्रा, मुख्य चिकित्साधिकारी।

Posted By: Jagran

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