जागरण संवाददाता, अहरौला (आजमगढ़) : हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि मरने के बाद उसके बेटे कंधा दें, लेकिन ग्राम परगासपुर के मुन्नीलाल की यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। उनके बड़े भाई मेवालाल ने कंधा देने के बाद मुखाग्नि दी। कारण कि मुन्नीलाल के तीनों बेटे पंजाब प्रांत के जालंधर में रहते हैं और समय से घर नहीं पहुंच सके।

राजमिस्त्री मुन्नीलाल गौतम का शुक्रवार की शाम सात बजे सजनी गांव से मकान निर्माण के बाद साइकिल से लौटते समय पक्खनपुर पेट्रोल पंप के समीप पुलिया के पास पिकअप के धक्के से घायल हो गए थे। पुलिस ने उन्हें सीएचसी पहुंचाया, जहां से रेफर होने के बाद फूलपुर के ताहिर मेमोरियल हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहां देर रात एक बजे मौत हो गई।

शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचा, तो पत्नी शोभावता देवी, छोटी बेटी इंद्र कला का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। मुन्नीलाल के पुत्र अशोक, अनिल और अभिषेक के पंजाब में होने के कारण नहीं पहुंच सके। ऐसे में बड़े भाई मेवा लाल ने तमसा नदी किनारे रात आठ बजे अंतिम संस्कार किया।

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