जागरण संवाददाता, मेंहनगर (आममगढ़): हरी खाद के लिए ढैंचा की खेती के प्रति किसानों का उत्साह बढ़ रहा है। किसानों का कहना है इससे न केवल उपज बेहतर होगी, बल्कि खेत की उर्वरा शक्ति अगली फसल तक बनी रहेगी।

धान की रोपाई से पूर्व जागरूक किसानों ने ढैंचा की बोवाई की। अधिकतर ने नर्सरी लगाने से पूर्व ही खेतों में उसका उपयोग कर दिया। करौती गांव के अभय कुमार, खेवसीपुर के राधेश्याम यादव, तिलसड़ा के रामआसरे ने बताया कि धान की रोपाई से चार दिन पहले हरी खाद बनाने के लिए खेतों में तैयार ढैंचा ट्रैक्टर से जोतवा दिया जाता है। उसके बाद रोपाई करने से अच्छी उपज मिलती है।इसका फायदा दो फसल की खेती में मिलता है। डीएपी का प्रयोग भी कम करना पड़ता है। राजकीय बीज भंडार के प्रभारी इंचार्ज अजित कुमार ने बताया कि ढैंचा की खेती से मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ती है और मिट्टी में जितने भी जीव पाए जाते हैं वह क्रियाशील होते है। खरपतवार भी कम होता है।

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