आजमगढ़ में चुनावी रंजिश में दो लोगों की मौत के बाद हत्या के आठ और कातिलाना हमले के छह आरोपित दोषी करार
आजमगढ़ में 2007 के चुनावी रंजिश वाले दोहरे हत्याकांड में 14 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है, जिसमें तत्कालीन ग्राम ...और पढ़ें

आजमगढ़ में 19 साल पुराने चुनावी रंजिश के दोहरे हत्याकांड में 14 दोषी करार, बिपिन सिंह भी शामिल।
HighLights
19 साल पुराने चुनावी रंजिश के मामले में फैसला।
तत्कालीन प्रधान बिपिन सिंह सहित 14 आरोपी दोषी करार।
कोर्ट 29 अक्टूबर को सुनाएगी सजा पर अंतिम फैसला।
जागरण संवाददाता, आजमगढ़। प्रधानी के चुनावी रंजिश में 19 वर्ष पूर्व 2007 में दशहरे के दिन रानी की सराय थाना क्षेत्र के रूदरी गांव में तत्कालीन ग्राम प्रधान और वर्तमान ब्लाक प्रमुख बिपिन सिंह और अधिवक्ता रामजन्म सिंह के परिवार के बीच हुए खूनी संघर्ष में हत्या के मामले में आठ आरोपितों एवं इसी मुकदमे के क्रास केस में कातिलाना हमले के छह आरोपितों को अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-एक के जज कमलापति ने सोमवार को सुनवाई करने के बाद दोनों पक्ष के 14 आरोपितों को दोषी करार दिया।
इस खूनी संघर्ष में अधिवक्ता रामजन्म सिंह के परिवार के दो सदस्यों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कोर्ट का निर्णय आने के बाद कड़ी सुरक्षा में सभी दोषियों को दोपहर करीब 2.30 बजे जेल भेज दिया गया। कोर्ट 29 अक्टूबर को सजा का फैसला सुनाएगी। कचहरी परिसर में दोनों पक्ष के समर्थक सुबह से ही निर्णय आने तक मुस्तैद रहे। हत्या के मामले में बिपिन सिंह समेत नौ लोग आरोपित बनाए गए थे, इसमें एक की मौत पूर्व में हो चुकी है। इसी तरह से दूसरे पक्ष के कातिलाना हमले में रामजन्म सिंह समेत छह आरोपित बनाए गए थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मुकदमा रामजन्म सिंह निवासी रुदरी थाना रानी की सराय 21 अक्टूबर 2007 को दशहरे के दिन सुबह नौ बजे अपने दरवाजे पर बैठे हुए थे। तभी गांव के तत्कालीन प्रधान बिपिन सिंह, राजेश सिंह, चुन्नू उर्फ़ रणविजय, बलवंत सिंह, राधेश्याम सिंह, छोटू उर्फ पंकज, लोकनाथ सिंह, जीवन प्रकाश और शिवदास सिंह हथियारों से लैस होकर दरवाजे पर आ गए।
बिपिन सिंह के ललकारने के बाद रामजन्म सिंह के घर के लोग उत्तर की तरफ भागे। इसी दौरान बिपिन सिंह ने तालुकदार सिंह को गोली मार दी और राजेश सिंह ने पारसनाथ सिंह को गोली मार दिया और मौके पर ही दोनो की मौत हो गई। इसके बाद अन्य आरोपितों ने रामजन्म सिंह के भतीजे अंकित सिंह और आशीष को लाठी डंडे से बुरी तरह से मारा। इस मामले में पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद चार्जशीट को न्यायालय में प्रेषित किया।
इस दौरान मुकदमे के एक आरोपित राधेश्याम सिंह की मृत्यु हो गई। इस मामले अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता गोपाल पांडेय, संजय सिंह और विंध्यवासिनी प्रसाद सिंह की तरफ से कुल सत्रह गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया गया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने सभी आरोपितों को हत्या का दोषी पाया। उधर इसी घटना के क्रास केस मे वादी मुकदमा बिपिन सिंह ने कातिलाना हमले की एफआईआर रानी की सराय थाना में उसी दिन दर्ज कराई थी।
पुलिस को दिए तहरीर में बिपिन सिंह ने आरोप लगाया कि रामदरस, आशीष सिंह, शक्ति सिंह, दीपक सिंह और रामजन्म सिंह ने उनके समर्थक बलवंत और अरविंद को बुरी तरह से मारा पीटा और असलहों से फायर किया। इसमें वादी बिपिन सिंह के पैर में गोली लगी। इस मामले में पुलिस ने छह आरोपितों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष की तरफ से कुल 22 गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया गया दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत में सभी छह आरोपितों को कातिलाना हमले और मारपीट का दोषी पाया।
