जागरण संवाददाता, आजमगढ़ : चालान कटे तो कटे लेकिन सीट बेल्ट का प्रचलन लगता है जिले में है ही नहीं। गैर जनपदों से आने वाली गाड़ियों में तो ड्राइवर को इसका उपयोग करते देखा जाता है लेकिन सीट बेल्ट लगाने वाले यहां की गाड़ियों के ड्राइवरों की संख्या काफी सीमित है। हालत यह है कि दो महीने में ही 360 वाहनों का चालान करने के साथ एक लाख 70 हजार जुर्माना वसूला गया। 11 लोगों की मौत भी हुई लेकिन उससे लोगों ने सीख नहीं ली।

जिले के किसी भी रास्ते पर चलिए तो पता चलता है कि तेज हॉर्न बजाने के अलावा यहां के ड्राइवरों को कोई प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया है। हालांकि गाड़ी में बेल्ट होता है लेकिन उसमें ड्राइवर बंधे हुए महसूस करते हैं। इसकी चिता वाहन मालिकों को भी नहीं रहती। हेलमेट व सीट बेल्ट को लेकर चलाए जा रहे जनजागरूकता अभियान के बाद भी लोग गंभीर नहीं है। यह अलग बात है कि जब से जुर्माना राशि बढ़ाई गई है तब से सड़क हादसों में कुछ कमी आई है। भारी जुर्माने को लेकर लोगों में भय भी पैदा हुआ है लेकिन नए नियम के बाद जो असर दिखना चाहिए वह अभी भी नहीं दिख रहा है। इसके लिए पुलिस, ट्रैफिक व संभागीय परिवहन विभाग की ओर से समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है। नियमों का पालन न करने पर वाहनों का चालान कर जुर्माना भी वसूला जाता है।

एसपी ट्रैफिक तारिक मोहम्मद का मानना है कि यातायात नियमों का पालन न करने के कारण अधिकतर दुर्घटनाओं में मौत हो रही हैं। बढ़ी हुई दरें उन पर लगाम लगाने के काम आ रही हैं। एसपी ट्रैफिक ने कहा कि जिले में सड़क हादसों पर गौर करने पर पता चलता है कि ज्यादातर दोपहिया चालक ही हादसे के शिकार होते हैं। हालांकि विभाग लगातार लोगों को जागरूक करने के साथ कार्रवाई भी कर रहा है।

Posted By: Jagran

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