जासं, आजमगढ़ : कोरोना ने प्रदेश के जेलों में बंदियों की एंट्री पर ब्रेक लगा दिया है। कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के के ²ष्टिगत यह कदम उठाया गया है। धोखे से भी किसी की एंट्री न हो जाए, इसके लिए कारागार के मुख्य द्वार पर नो एंट्री की नोटिस चस्पा है। बंदियों को प्रवेश दाखिले से पूर्व नौ दिन का आइसोलेशन एवं 14 दिन क्वारइंटाइन बिताना पड़ेगा।

जिला कारागार में करीब 1500 से अधिक बंदी निरुद्ध हैं। इनमें सजायाफ्ता कैदियों की भी तादाद बड़ी है। कोरोना वायरस के संक्रमण से बंदियों को बचाने के लिए जेल प्रशासन ने नए बंदियों की एंट्री पर रोक लगा दी है। विभिन्न आरोपों में पकड़े गए आरोपितों को मुख्य जेल के बगल में स्थित बाल बैरक में रखा जाएगा। 23 दिन की अवधि पूरी होने के बाद मुख्य जेल के मुलायजा बैरक (नए बंदी के रखे जाने वाला बैरक) में रखा जाएगा। इसके बाद बैरक आवंटित होने के बाद संबंधित बैरक में दाखिल कर दिये जाएंगे।

अस्पताल में भी अलग व्यवस्था

जिला कारागार में निरुद्ध बीमार बंदियों के लिए जेल अस्पताल में भी अलग से व्यवस्था की है। अलग से बेड लगाया गया है। जहां डॉक्टर से लेकर फार्मासिस्ट इनका स्वास्थ्य परीक्षण के साथ ही दवा इलाज करेंगे। अगर कोई बंदी गंभीर बीमार होगा तो उसे जिला अस्पताल भेजने की भी व्यवस्था है।

'कोरोना वायरस के संक्रमण से बंदियों को बचाने के लिए सभी सुरक्षा व्यवस्था की गयी है। मॉस्क, सैनिटाइजर, डिटॉल के साथ ही साबुन भी सभी बंदियो को दिये गए हैं। उन्हें साफ-सफाई व सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। शारीरिक दूरी के पालन के साथ ही बंदियों के इम्यूनिटी बढ़ाने पर भी ध्यान रखा जा रहा है।'

राधाकृष्ण मिश्र, जेल अधीक्षक

Posted By: Jagran

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