जागरण संवाददाता, आजमगढ़ : एक सप्ताह से पड़ रही हाड़ कंपा देने वाली ठंड से लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है। बेकाबू होती ठंड व गलन से हर कोई कांपता नजर आ रहा है। शनिवार की सुबह घने कोहरे के बीच वाहन सड़कों पर लाइट जलाकर रेंगते नजर आए। जिससे आवागमन में यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसके बाद कुछ देर बाद ही मौमस का मिजाज और बिगड़ गया। आसमान में बादल छा गए। इसके चलते भगवान भास्कर के दर्शन नहीं हुए।

दोपहर बाद से शुरू हुई बूंदाबादी से ठिठुरन बढ़ गई। ठंड व गलन बढ़ने से लोग पूरे दिन ऊनी कपड़ों में अपने को समेट कर रखे। शाम होते ही शहर की सड़कें सूनी हो गईं। शनिवार को अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहा। हवा की गति 8 से 11 किमी प्रति घंटा रही, जबकि आ‌र्द्रता 77 फीसद रिकार्ड किया गया।

अलाव के सहारे लोग ठंड से बचाव के प्रयास में लगे रहे। हल्की हवा भी चलने से ठंड को और मजबूती मिल जा रही थी। कड़ाके की ठंड से लोगों की दिनचर्या भी बदल गई। हालत यह है कि खुले में 10 मिनट बैठने के बाद कमरों में जाना मजबूरी बन गई। लोग रात को यात्रा करने से कतराने लगे हैं। सबसे अधिक दिक्कत श्रमिक वर्ग को रही है। उन्हें काम का अभाव हो गया है। कड़ाके की ठंड का असर सरकारी व निजी कार्यालयों में भी देखने को मिला। मौसम के उतार-चढ़ाव से किसान परेशान हो गए हैं। बूंदाबांदी व कोहरे की मार सरसों व अरहर की फसलों के लिए अभिशाप बन सकती है। किसानों का कहना है कि यदि कोहरे व बादलों का दौर लंबे समय तक चला तो इसमें माहर रोग का खतरा बढ़ जाएगा। कड़ाके की ठंड के चलते आलू की फसल में पाला रोग लगने का भी खतरा है।

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