आजमगढ़ की शिक्षिका डाॅक्टर अर्चना सिंह और भावना वर्मा के नवाचार एससीईआरटी के उद्गम पोर्टल पर चयनित
आजमगढ़ की दो शिक्षिकाओं, डॉ. अर्चना सिंह और भावना वर्मा, के नवाचारी शिक्षण प्रयासों को एससीईआरटी के उद्गम पोर्टल पर ...और पढ़ें

आजमगढ़ की शिक्षिकाओं के नवाचारों को एससीईआरटी उद्गम पोर्टल पर मिली पहचान।
HighLights
डॉ. अर्चना सिंह का नवाचार 'रंगों से संस्कृति तक' चयनित।
भावना वर्मा का 'भाषा बने आसान' नवाचार भी शामिल।
दोनों नवाचारों से बच्चों की उपस्थिति और सीखने में वृद्धि।
जागरण संवाददाता, आजमगढ़। जनपद की दो शिक्षिकाओं के कक्षा में किए जा रहे नवाचारी प्रयासों को राज्य स्तर पर पहचान मिली है। कंपोजिट विद्यालय देवारा तुर्कचारा, विकासखंड महाराजगंज की सहायक अध्यापिका डाक्टर अर्चना सिंह तथा कंपोजिट विद्यालय जहानियापुर, विकासखंड मोहम्मदपुर की सहायक अध्यापिका भावना वर्मा के नवाचारों का चयन एससीईआरटी के उद्गम पोर्टल पर किया गया है।
कंपोजिट विद्यालय देवारा तुर्कचारा की शिक्षिका डाक्टर अर्चना सिंह के नवाचार ‘रंगों से संस्कृति तक’ के माध्यम से ग्रामीण परिवेश के बच्चों को भारतीय पारंपरिक चित्रकलाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस नवाचार के अंतर्गत बच्चों को मधुबनी, मंडला, वारली, गोंड और कोहबर जैसी भारतीय लोक एवं पारंपरिक चित्रकलाओं का परिचय कराने के साथ-साथ उन्हें स्वयं चित्र बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
इस पहल में पारंपरिक कला शिक्षण को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए आईसीटी का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। यूट्यूब, दीक्षा ऐप, प्रोजेक्टर, डिजिटल सामग्री तथा विद्यालय के व्हाट्सऐप समूह के माध्यम से बच्चों को विभिन्न चित्रकलाओं की तकनीक, रंगों, आकृतियों और उनके सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी जाती है।
बच्चे विद्यालय में अभ्यास करने के साथ-साथ घर पर भी चित्र बनाकर साझा करते हैं और शिक्षक के सुझावों के आधार पर उनमें सुधार करते हैं। समूह कार्य, विद्यालय की दीवारों पर चित्रांकन, कला प्रदर्शनियों तथा डिजिटल माध्यम से अपने कार्य साझा करने जैसी गतिविधियों को भी नवाचार का हिस्सा बनाया गया है।
इस नवाचार के माध्यम से बच्चों में भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति रुचि विकसित होने के साथ उनकी रचनात्मकता, कल्पनाशीलता, एकाग्रता, धैर्य, हाथ-आंख समन्वय और महीन कार्य करने की क्षमता में भी सुधार हुआ है। कला गतिविधियों ने बच्चों को विद्यालय से जोड़ने और सीखने को आनंददायक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन गतिविधियों के परिणामस्वरूप बच्चों की उपस्थिति और विद्यालय में ठहराव में भी वृद्धि हुई है।
वहीं, कंपोजिट विद्यालय जहानियापुर, विकासखंड मोहम्मदपुर की सहायक अध्यापिका भावना वर्मा के नवाचार ‘नवाचारी गतिविधियों से भाषा बने आसान’ का भी उद्गम पोर्टल पर चयन किया गया है। इस नवाचार का उद्देश्य प्रारंभिक कक्षाओं के विद्यार्थियों में बुनियादी भाषा कौशल को रोचक, सहज और गतिविधि-आधारित तरीकों से विकसित करना है।
इसके अंतर्गत बच्चों को खेल-खेल में तथा विभिन्न टी.एल.एम.-आधारित गतिविधियों के माध्यम से अक्षरों और शब्दों की पहचान, मात्राओं की समझ तथा शुद्ध उच्चारण का अभ्यास कराया जाता है। गतिविधियों को बच्चों के स्तर और रुचि के अनुरूप तैयार किया जाता है, जिससे वे बिना किसी दबाव के भाषा सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
नियमित अभ्यास के कारण बच्चों में भाषा सीखने के प्रति रुचि और आत्मविश्वास बढ़ा है तथा वे शब्दों को बेहतर ढंग से पहचानने और पढ़ने लगे हैं। इन गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव बच्चों की कक्षा सहभागिता और सीखने की गति पर भी दिखाई दे रहा है। बुनियादी भाषा कौशल में सुधार के साथ बच्चों की उपस्थिति और विद्यालय में ठहराव में भी वृद्धि हुई है।
दोनों शिक्षिकाओं द्वारा अपनी कक्षाओं में किए जा रहे इन नवाचारी प्रयासों का विस्तृत विवरण तैयार कर एससीईआरटी के उद्गम पोर्टल पर अपलोड किया गया था। उद्गम पोर्टल की तकनीकी एवं चयन टीम द्वारा प्रस्तुत नवाचारों का परीक्षण एवं मूल्यांकन किया गया। नवाचारों की गतिविधियों, उनकी उपयोगिता, बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव तथा प्राप्त परिणामों का अवलोकन करने के बाद दोनों शिक्षिकाओं के नवाचारों को चयनित करते हुए स्वीकृति प्रदान की गई।
