'घर पर किसी का बुरा साया', मां का शक बना खूनी विवाद की वजह? आजमगढ़ हत्याकांड की पूरी कहानी
आजमगढ़ के शंभूपुर गहजी गांव में अरविंद सिंह ने दो पुरोहित, अपनी पत्नी और बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी।

आरोपी अरविंद भी पुलिस एनकाउंटर में मारा गया।
HighLights
आजमगढ़ में दो पुरोहित, पत्नी और बेटे की हत्या
आरोपी अरविंद सिंह ने नशे में धुत होकर गोली चलाई
जागरण संवाददाता, आजमगढ़। मृतक पुरोहित अखिलेश मिश्रा के पुत्र हिमांशु ने बताया कि आरोपित अचानक घर में आया और पूछने लगा कि उसके घर में कैसे आए हो। इस पर उसके पिता ने बताया कि घरवालों ने पूजा कराने के लिए बुलाया है, इसलिए आए हैं। बिना बुलाए वह नहीं आए हैं।
इसके बाद आरोपित आधार कार्ड दिखाने की बात कहने लगा। आरोप है कि इसी दौरान वह लाठी और कुल्हाड़ी लेकर मारने के लिए दौड़ पड़ा। हिमांशु ने बताया कि आरोपित की पत्नी बबीता बीच-बचाव करने पहुंची तो उसने रिवॉल्वर निकालकर पहले उसे गोली मार दी।
इसके बाद उसके पिता अखिलेश मिश्रा बचने के लिए भागने लगे। आरोपित ने उन पर भी गोली चला दी। पहली गोली से वह बच गए, लेकिन आरोपित ने दोबारा गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। बाद में उसने बेटे की भी गोली मारकर हत्या कर दी।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देर रात आरोपी अरविंद भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। उसने खुद के बचाव के लिए अपने बच्चों को कमरे में बंधक बनाकर रखा था। एटीएस कमांडो उतरी और फिर दोनों तरफ से फायरिंग में आरोपी मारा गया।
आठ साल पहले बड़े भाई सुनील की हुई थी हत्या
शंभूपुर गहजी गांव में मंगलवार को हुई चार हत्याओं के पीछे परिवार की पुरानी परिस्थितियां भी चर्चा में हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, अरविंद सिंह के बड़े भाई सुनील सिंह उर्फ गुड्डू की वर्ष 2018 में गांव के मंदिर में पूजा के बाद आयोजित भंडारे के दौरान हत्या कर दी गई थी।
सुनील सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते थे, जबकि अरविंद कोई नियमित काम नहीं करता था। लोगों के अनुसार मंगलवार की घटना में इस्तेमाल किया गया। लाइसेंसी हथियार पहले सुनील के नाम था। बाद में उसका स्थानांतरण अरविंद के नाम हो गया था। बेटे की हत्या के बाद मां शमला देवी अक्सर चिंता में रहती थीं। लोगों के अनुसार, उन्हें आशंका रहती थी कि घर में किसी ने कुछ करा दिया है। घर पर बुरा साया है।

लोगों ने बताया कि अरविंद नशे का आदी था और घटना वाले दिन भी वह नशे में था। लोगों के अनुसार, उसकी नशे की लत छुड़ाने और घर में शांति के लिए ही पांच दिवसीय पूजा का आयोजन कराया जा रहा था। अरविंद के बड़े भाई सुनील की पत्नी ममता दिल्ली में किसी कंपनी में काम करती हैं। उनकी दोनों बेटियां अपनी दादी शमला देवी के साथ शंभूपुर गहजी गांव में रहती थीं।
