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अब ट्रायल के बंदियों को कोर्ट ले जाने की नहीं होगी जरूरत, आजमगढ़ में कारागार से होगी ऑनलाइन पेशी

Published: Mon, 26 Oct 2026 09:13 PM (IST)

आजमगढ़ जिला कारागार में बंदियों की पेशी के लिए नया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम तैयार है, जो नवंबर से संचालित होगा। ...और पढ़ें

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. आजमगढ़ जेल में नया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम तैयार।

  2. नवंबर से ट्रायल बंदियों की ऑनलाइन पेशी होगी।

  3. सुरक्षा बढ़ेगी, प्रतिदिन डेढ़ लाख रुपये की बचत।

मोहन प्रताप राव, आजमगढ़। जिला कारागार के ट्रायल के बंदियों को पेशी के लिए विभिन्न न्यायालयों में ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कारागार में ही वीडियो कॉफ्रेंसिंग रूम बनकर तैयार है और इसमें लगने वाले उपकरण भी आ गए हैं। कॉफ्रेंसिंग रूम में सिर्फ उपकरणों को लगाया गया है। इस कॉफ्रेंसिग रूम के नवंबर माह से संचालित होने की उम्मीद कारागार प्रशासन को है। कारागार में यह दूसरा वीडियो कॉफ्रेंसिंग रूम है।

अभी तक रिमांड के बंदियों की ऑनलाइन पेशी के लिए वीडियो कॉफ्रेंसिंग रूम बना है। वर्तमान समय में ट्रायल के 464 और रिमांड के 407 बंदी जेल में हैं। वीडियो कॉफ्रेंसिंग रूम से पेशी कराए जाने से इनकी सुरक्षा भी पूरी तरह से जेल के अंदर ही सुनिश्चित हो सकेगी।

कारागार में बन रहा वीडियो कॉफ्रेंसिंग रूम में हर कोर्ट के बंदियों की पेशी के लिए अलग-अलग केबिन बनाए गए हैं। बंदियों को वीडियो कॉफ्रेंसिंग रूम में जाने से पहले बैठने के लिए प्रतीक्षालय भी बना है। जिस कोर्ट के बंदी की पेशी होगी, सिर्फ उसी बंदी को वीडियो कॉफ्रेंसिंग रूम में पेशी के लिए प्रवेश की अनुमति मिलेगी। शेष बंदी प्रतीक्षालय में ही अपनी पेशी का इंतजार करेंगे। इसके साथ ही कोर्ट की मांग या बहुत आवश्यकता पड़ने पर ही बंदी को न्यायालय भेजा जाएगा।

प्रतिदिन कारागार से कोर्ट के लिए तीन गाड़ियों से भेजे जाते हैं बंदी

जिला कारागार में प्रतिदिन 120 से 130 बंदियों को तीन गाड़ियों से न्यायालय के लिए भेजा जाता है। इनकी सुरक्षा के लिए 80 से अधिक पुलिसकर्मियों को लगाया जाता है।

बंदियों को कारागार से न्यायालय ले जाने और वहां से लेकर आने में प्रतिदिन डेढ लाख से अधिक खर्च होता है। वीडियो कॉफ्रेंसिंग रूम के माध्यम से ट्रायल के बंदियों की पेशी कराए जाने के बाद से यह धनराशि तो बचेगी ही, साथ ही सिपाही जेल में ही अपनी ड्यूटी कर सकेंगे। नवंबर माह से वीडियो कॉफ्रेंसिंग रूम को संचालित करा दिया जाएगा। -सत्यप्रकाश सिंह, जेल अधीक्षक।