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'भाजपा की बी टीम' होने के आरोप पर एआइएमआइएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आजमगढ़ में दी सफाई

By Mohan Pratap RaoEdited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 12 Oct 2026 07:33 PM (IST)

आजमगढ़ में असदुद्दीन ओवैसी ने सपा के गढ़ में जनसभा कर भाजपा और सपा को सीधी चुनौती दी। उन्होंने मुस्लिम ...और पढ़ें

आजमगढ़ में ओवैसी का सपा-भाजपा पर हमला, मुस्लिम नेतृत्व की अपील और बी-टीम के आरोपों पर सफाई।

आजमगढ़ में ओवैसी का सपा-भाजपा पर हमला, मुस्लिम नेतृत्व की अपील और बी-टीम के आरोपों पर सफाई।

HighLights

  1. ओवैसी ने आजमगढ़ में सपा-भाजपा को सीधी चुनौती दी।

  2. मुस्लिम समाज से अपना राजनीतिक नेतृत्व खड़ा करने का आह्वान।

  3. भाजपा की बी-टीम आरोपों पर ओवैसी ने किया पलटवार।

जागरण संवाददाता, आजमगढ़। विधानसभा चुनाव-2027 से पहले समाजवादी पार्टी के सबसे मजबूत गढ़ आजमगढ़ में एआइएमआइएम ने अपनी सियासी जमीन तलाशनी शुरू कर दी है।  पार्टी अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को आजमगढ़ के दीदारगंज विधानसभा क्षेत्र में जनसभा कर भाजपा और सपा को सीधी चुनौती दी।

करीब 20 हजार लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने मुस्लिम समाज से अपना राजनीतिक नेतृत्व खुद खड़ा करने की अपील की। ओवैसी जब मुस्लिम समाज की चुनौतियां के बारे में बता रहे थे, तालियों की गूंज उन्हें मिल रहे समर्थन का उद्घोष कर रही थीं। आम जनता से कौम का नेता बनने का आह्वान करते हुए ओवैसी ने कहा कि अब समाज को किसी गांधी या नेहरू के सहारे की जरूरत नहीं, बल्कि अपने बीच से निकले नेतृत्व की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि हम किसी के गुलाम नहीं हैं और केवल इस आधार पर किसी के पीछे नहीं चलेंगे कि कोई खुद को अगला नेहरू या गांधी बताता है। गांधी और नेहरू जैसे नेता भी इस समाज के बीच से भी निकल सकते हैं। मुस्लिम समाज के लोगों को सपा में दरी बिछाने तक सीमित रहने के बजाय अपनी कौम के लिए खुद संघर्ष करने वाला नेता बनना चाहिए।

सपा पर निशाना साधते हुए मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और आजम खां का नाम लिया। कहा कि इन नेताओं ने सपा के लिए बहुत कुछ किया, पर सवाल यह है कि सपा ने उनके लिए क्या किया। लोगों ने तालियां बजाकर अपना समर्थन जताया।

भाजपा की बी-टीम होने के आरोपों पर ओवैसी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जनता देख रही है कि किस तरह सपा और कांग्रेस से जुड़े लोग भाजपा का दामन थाम रहे हैं।

एआइएमआइएम भाजपा और सपा से अलग जनता को बेहतर विकल्प देने के लिए थर्ड फ्रंट खड़ा करने की तैयारी में है। 2022 के चुनाव में पार्टी ने जिले की दस में से छह सीटों सदर, मुबारकपुर, गोपालपुर, मेंहनगर, दीदारगंज और निजामाबाद पर प्रत्याशी उतारे थे। शेष चार सीटों पर जन अधिकार पार्टी और भारत मुक्ति मोर्चा के साथ गठबंधन में प्रत्याशी लड़ाए गए थे।

इस बार भी पार्टी कुछ दलों के संपर्क में है। गठबंधन होने पर सीटों का बंटवारा बाद में तय होगा, जबकि गठबंधन न बनने की स्थिति में पार्टी सभी दस सीटों पर अकेले उतरेगी। एआइएमआइएम के जिलाध्यक्ष नदीम आरिफ ने कहा, "पार्टी जिले की सभी दस सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

सपा का यह भ्रम तोड़ना है कि आजमगढ़ उसका गढ़ है।" सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि ओवैसी के यहां आने का सपा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वह चाहे जितनी जनसभाएं कर लें, लोग जानते हैं कि उनकी पार्टी भाजपा की बी-टीम है।

सियासी मायने: एम-वाई समीकरण में सेंध की कोशिश
आजमगढ़ की सियासत में सपा की पकड़ का आधार मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण माना जाता है। जिले की दोनों लोकसभा सीटें, आजमगढ़ और लालगंज, तथा सभी दस विधानसभा सीटें सपा के पास हैं। पड़ोस की घोसी लोकसभा सीट भी सपा के कब्जे में है।

सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव यहां से सांसद रह चुके हैं, जबकि वर्तमान में अखिलेश के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव यह सीट संभाल रहे हैं। अब तक यही माना जा रहा था कि सपा को चुनौती भाजपा से मिल रही है, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद वह इस किले में निर्णायक सेंध नहीं लगा पाई है। ऐसे में ओवैसी की सभा ने नया समीकरण खड़ा कर दिया है।

जिले में करीब 22 फीसद मुस्लिम मतदाता हैं, और यदि एआइएमआइएम इसमें से कुछ प्रतिशत वोट भी अपने पक्ष में खींच पाई तो सीधा नुकसान सपा को और अप्रत्यक्ष लाभ भाजपा को हो सकता है। यही कारण है कि सपा इस सभा को हल्के में लेती दिख रही है, पर राजनीतिक गलियारों में इसके मायने गंभीरता से तलाशे जा रहे हैं।