जागरण संवाददाता, आजमगढ़ : जिला कारागार में निरुद्ध विचाराधीन बंदी की शनिवार को सुबह हृदयगति रुकने से मौत हो गई। खबर मिलते ही परिवार के लोग भी जिला अस्पताल आ गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन की लापरवाही से मौत हुई है। पीड़ित भाई ने जेल प्रशासन पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह मिलने गए तो भाई स्वस्थ्य थे।

मेंहनगर थाना क्षेत्र के असोसा गांव निवासी ओम प्रकाश यादव (40) पुत्र मंता यादव हत्या व जानलेवा हमले के अलग-अलग मुकदमे में 31 अगस्त 2018 से जिला कारागार में निरुद्ध थे। जेल अधीक्षक आरके मिश्र ने बताया कि विचाराधीन बंदी ओमप्रकाश की गिरफ्तारी से पूर्व ही हार्ट की बाईपास सर्जरी हुई थी। वे हार्ट के पेसेंट थे।  22 मार्च को उसके सीने में दर्द उभरा तो जेल अस्पताल से जिला चिकित्सालय लेकर जेल के कर्मी पहुंचे। जिला अस्पताल से रेफर कर दिए जाने पर उसे 25 मार्च को जेल कर्मी बीएचयू ले गए। वहां पर भर्ती करने से डाक्टर ने इंकार कर दिया। जेल अस्पताल में ही उसका दवा इलाज चल रहा था। शनिवार की सुबह छह बजे बंदियों के गिनती के लिए जेल खुला तो ओमप्रकाश के सीने में दर्द उभरा। जेल कर्मी उसे लेकर जिलाचिकित्सालय ले गए, जहां डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बंदी के मौत की खबर जेल प्रशासन ने परिजनों को दी। भाई अमर प्रकाश ने बताया कि ओम प्रकाश को कोई बीमारी नहीं थी, जेल के अधिकारी झूठ बोल रहे हैं। 22 मार्च से पूर्व वे जेल में मिलने के लिए गए थे तो ओम प्रकाश पूरी रूप से स्वस्थ्य थे। उनके तीन पुत्री व एक पुत्र हैं।

Posted By: Jagran

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