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2022 का सबक, 2024 की बढ़त और 2027 की चुनौती, रुदौली में सपा के सामने बड़ा सवाल

By Nafees Edited By: Shivam Yadav
Published: Wed, 16 Sep 2026 09:22 PM (IST)

रुदौली विधानसभा चुनाव 2027 के लिए समाजवादी पार्टी के टिकट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है, जहाँ पार्टी ...और पढ़ें

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HighLights

  1. रुदौली में सपा को 2022 के बिखरे वोटों को जोड़ना।

  2. 2024 लोकसभा बढ़त को 2027 विधानसभा चुनाव में भुनाना।

  3. मोहम्मद अली, अनित शुक्ला सहित कई नेता टिकट के दावेदार।

नफीस खां, रुदौली (अयोध्या)। विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ रुदौली में समाजवादी पार्टी के टिकट को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं।

एसआईआर के बाद रुदौली विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,19,308 मतदाता रह गए हैं। एसआईआर से पहले यह संख्या 3,59,610 थी। यानी नई मतदाता सूची में करीब 40 हजार की कमी आई है।

यह बदलाव आगामी विधानसभा चुनाव में बूथवार और मतदाता समूहों की नई रणनीति को महत्वपूर्ण बना सकता है। रुदौली में सपा को पिछले तीन विधानसभा चुनावों से हार का सामना करना पड़ रहा है।

तस्वीर को काफी हद तक स्पष्ट

पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो मौजूदा राजनीतिक तस्वीर को काफी हद तक स्पष्ट करता है, जिसमें सपा प्रत्याशी को वर्ष 2012 के चुनाव में 60,232 वोट, 2017 में 59,052 वोट, 2022 में 53,415 वोट मिले थे।

2012 में अब्बास अली जैदी उर्फ रुश्दी मियां सपा प्रत्याशी के रूप में भाजपा के रामचंद्र यादव से बेहद करीबी मुकाबले में रहे। भाजपा को 61,173 और सपा को 60,232 वोट मिले, जिसमें अंतर महज 941 वोट का ही था। 2017 में भी सपा के अब्बास अली जैदी को 59,052 वोट मिले, जबकि भाजपा के रामचंद्र यादव को 90,311 वोट मिले।

2022 में राजनीतिक मोड़

सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ 2022 में आया। सपा के आनंदसेन यादव को 53,415 वोट, जबकि सपा से अलग होकर बसपा के टिकट पर उतरे अब्बास अली जैदी 'रूश्दी मियां' को 52,181 वोट मिले। दोनों वोटों को जोड़ने पर संख्या 1,05,596 बैठती है। भाजपा के रामचंद्र यादव को 94,031 वोट मिले और उन्होंने 40,616 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

यही आंकड़ा 2027 की सपा रणनीति का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल बन गया कि क्या पार्टी 2022 में बिखरे वोटों को एक मंच पर ला पाएगी? लोकसभा चुनाव 2024 पर नजर डालें तो रुदौली विधानसभा क्षेत्र में सपा के अवधेश प्रसाद को 1,04,113 वोट, जबकि भाजपा के लल्लू सिंह को 92,410 वोट मिले। यानी सपा ने रुदौली में 11,703 वोटों की बढ़त हासिल की थी।

यही बढ़त अब सपा के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक आधार मानी जा रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में जहां सपा और रूश्दी मियां के वोट अलग-अलग खेमों में चले गए थे, वहीं 2024 में सपा ने भाजपा पर बढ़त बनाई। इसलिए 2027 का चुनाव केवल प्रत्याशी चुनने का नहीं, बल्कि 2022 के बिखरे समीकरण को 2024 की बढ़त के साथ जोड़ने की परीक्षा भी होगी।

युवा चेहरे के तौर पर पार्टी के प्रदेश सचिव और तीन बार से जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद अली भी संगठन में सक्रियता और लगातार क्षेत्रीय संपर्क के जरिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। वहीं, जिला उपाध्यक्ष अनित शुक्ला की भी दावेदारी जेन जी के रूप में देखी जा रही है जो युवा मतदाताओं के बीच अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

नेताओं को एकजुट करने में लगे डाॅ. पुष्कर यादव 

पार्टी के अनुभवी और वरिष्ठ नेता डाॅ. पुष्कर यादव भी अपनी दावेदारी के बीच रुदौली के पार्टी नेताओं को एकजुट करने में लगे हुए है। पूर्व विधायक अब्बास अली जैदी के पास भी लंबा राजनीतिक अनुभव और पुराना जनाधार है।

रुदौली में 2027 की लड़ाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल यह नहीं होगा कि सपा का टिकट किसे मिलता है। असली सवाल यह होगा कि कौन सा चेहरा सपा के पुराने जनाधार, पीडीए समीकरण, संगठन और 2024 की लोकसभा बढ़त को एक साथ चुनावी ताकत में बदल सकता है।

तीन विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि सपा का वोट आधार रुदौली में लगातार मौजूद रहा है। ऐसे में बूथवार संगठन, नए मतदाता, महिला मतदाता, युवा मतदाता और स्थानीय मुद्दे 2027 की चुनावी रणनीति के केंद्र में रहेंगे।