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सरयू में विसर्जित हुई थीं बापू की अस्थियां, रामनगरी में आज भी जीवित हैं स्मृतियां

Published: Fri, 02 Oct 2026 02:25 PM (IST)

महात्मा गांधी का अयोध्या से गहरा संबंध था, जहां उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान दो बार दौरा किया और सरयू में स्नान किया।

रामनगरी में आज भी जीवित हैं बापू की स्मृतियां।

रामनगरी में आज भी जीवित हैं बापू की स्मृतियां।

HighLights

  1. बापू ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अयोध्या का दो बार दौरा किया।

  2. उनके निधन के बाद अस्थियां सरयू नदी में विसर्जित हुईं।

  3. अयोध्या में गांधी के रामराज्य और सत्य के आदर्श आज भी प्रासंगिक।

जागरण संवाददाता, अयोध्या। रामनगरी से महात्मा गांधी का रिश्ता केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं है। राम, रामराज्य, सत्य और अहिंसा के आदर्शों से जुड़ी उनकी विचारधारा का स्पर्श अयोध्या में आज भी महसूस किया जा सकता है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में बापू दो बार अयोध्या आए।

सभाओं में स्वतंत्रता का संदेश दिया और सरयू में स्नान कर रामनगरी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। उनके निधन के बाद उनकी अस्थियों का सरयू में विसर्जन हुआ, जिससे अयोध्या से जुड़ी उनकी स्मृतियां और गहरी हो गईं।

आज धार्मिक पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित हो रही रामनगरी में ये स्मृति स्थल उस दौर की याद दिलाते हैं, जब रामनगरी धार्मिक आस्था के साथ स्वतंत्रता आंदोलन की गतिविधियों की भी साक्षी थी।

महात्मा गांधी पहली बार 20 फरवरी 1921 को अयोध्या पहुंचे थे। चौरी-चौरा कांड के विरोध और असहयोग आंदोलन के दौरान राष्ट्रव्यापी दौरे के क्रम में यहां उन्होंने जालपा देवी मंदिर के निकट मैदान में सभा को संबोधित किया।

सभा के बाद उन्होंने फैजाबाद के धारा रोड स्थित बाबू शिवप्रसाद की कोठी में रात्रि विश्राम किया। अगले दिन भोर में सरयू स्नान किया। वर्ष 1929 में गांधी दूसरी बार रामनगरी आए। देश के प्रथम राष्ट्रपति बने डॉ. राजेंद्र प्रसाद सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी बापू की अस्थियां लेकर अयोध्या पहुंचे और सरयू में उनका विसर्जन किया।

सरयू तट पर गांधी ज्ञान मंदिर उनके विचारों और आदर्शों को आगे बढ़ा रहा है। वर्ष 1988 में सरयू तट पर गांधीजी की प्रतिमा स्थापित की गई। सिविल लाइंस स्थित गांधी पार्क भी उनकी स्मृतियों को सहेजे हुए है।

समाजसेवी डॉ. नेहाल रजा बताते हैं कि प्रभु राम से जुड़ी उनकी आस्था व विचारधारा रामनगरी में प्रवहमान है। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और मानव कल्याण के लिए प्रेरणा देते हैं।