भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट पारुल सिंह बनीं युवतियों की प्रेरणा, अयोध्या का नाम किया रोशन
अयोध्या की पारुल सिंह ने अपनी मां के सपने को साकार करते हुए भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट बनकर अब कमांडर ...और पढ़ें

प्रमोद दुबे, अयोध्या। पारुल सिंह बचपन में मां रंजना सिंह के दिखाए सपने को पूरा करने के लिए दिन रात परिश्रम करती रहीं। इसी परिश्रम के चलते वह भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट बन गईं। पारुल की सफलता ने उनके हौसले को ही नहीं बुलंद किया, बल्कि वे दूसरी युवतियों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।
पारुल सिंह का परिचय
पारुल विकासखंड तारुन अंतर्गत ग्रामसभा गौरा के छोटे से पुरवा मंगलपुर की निवासी हैं। पिता जितेंद्र प्रताप सिंह भारतीय वायुसेना में तैनात हैं। पारुल की मां रंजना गृहणी हैं। अब तो पारुल छुट्टियों में घर आने पर स्कूलों में पहुंच कर छात्राओं को सफलता का मंत्र भी देती हैं।
कमांडर पद पर पदोन्नति
पारुल सिंह ने जून 2021 में भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त किया था, पदोन्नति पाकर वर्तमान में कमांडर (वारंट आफिसर) पद पर कोच्चि में जिम्मेदारी निभा रही हैं। वे सिर्फ एक सैन्य अधिकारी नहीं, बल्कि एक शिक्षक, मनोवैज्ञानिक, मैराथन धावक और प्रेरणादायक वक्ता भी हैं।
उनका जीवन एक ऐसी यात्रा है जिसमें कई मोड़ आए कठिनाइयां, असफलताएं, आत्ममंथन और विजय शामिल है, लेकिन इस पूरी यात्रा में उन्होंने कभी अपने उद्देश्य से पीछे मुड़ कर नहीं देखा। पारुल कहती हैं वर्दी में पिता को देख कर मन में सैन्य सेवा का बीज रोपित होता रहा, लेकिन इसे साकार करने में मां की अटूट आस्था है, जो उनकी पहली शिक्षक के साथ प्रेरक शक्ति बनी रहीं।
प्रेरणा मान कर आगे बढ़ रही युवतियां
पारुल ने रामनगरी के केंद्रीय विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। उन्हाेंने न केवल अकादमिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, बल्कि अपने भीतर नेतृत्व, सेवा और सामाजिक जागरूकता को भी विकसित किया। इसका परिणाम है कि ऐसी अधिकारी बनी जिसके लिए दूसरी युवतियां उन्हें प्रेरणा मान कर आगे बढ़ रही हैं।
उनकी पेशेवर दक्षता और सेवा के प्रति समर्पण का प्रमाण नौसेना दिवस 2024 पर मिला जब अधिकारियों को दिए जाने वाले फ्लैग आफिसर कमांडिंग -इन-चीफ एसएनसी प्रशस्ति से सम्मानित किया गया। आज उनका जीवन केवल सैन्य अनुशासन तक ही सीमित नहीं है। वे लांग डिस्टेंस रनिंग और हाफ मैराथन में भाग लेकर रनर रहीं।
