अयोध्या में मलबे वाली भूमि पर बनेगा विशाल मियावाकी जंगल, शहर को मिलेगी भरपूर ऑक्सीजन और हरियाली
अयोध्या में एक हेक्टेयर से अधिक भूमि पर मियावाकी पद्धति से 36 हजार से अधिक पौधे लगाकर जंगल विकसित किया जाएगा।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
अयोध्या में एक हेक्टेयर से अधिक भूमि पर मियावाकी जंगल का विकास।
पूर्व मलबे वाली भूमि पर 36 हजार से अधिक पौधे लगेंगे।
वन विभाग तीन साल पौधों का संरक्षण कर छावनी को सौंपेगा।
विशाल शुक्ल, अयोध्या। जिस भूमि से 250 से अधिक ट्राली कंक्रीट का मलबा निकाला गया, अब उसी भूमि पर वन विभाग मियावाकी पद्धति से जंगल विकसित करेगा। छावनी परिषद की यह भूमि नियांवा-जमथराघाट रोड के पूरब स्थित है।
छावनी परिषद ने इस भूमि पर जंगल विकसित करने की अनुमति वन विभाग को दे दी है। तीन वर्ष तक वन विभाग इस भूमि पर रोपित पौधों का संरक्षण करेगा और फिर यह विकसित जंगल छावनी परिषद को सौंप दिया जाएगा। यह सारी प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। अब इस भूमि को तार-बाड़ से घेराबंदी कर सुरक्षित किया जा रहा है।
भूमि का समतलीकरण पूरा
पंपिंग सेट लगाने के लिए बोरिंग कराई जा रही है, जिससे पौधों की सिंचाई में बाधा न उत्पन्न हो। भूमि का समतलीकरण किया जा चुका है। 20 सितंबर से पूर्व सभी तैयारी पूर्ण कर ली जाएगी, जिसके बाद मियावाकी पद्धति से पौधारोपण शुरू होगा।
इस भूमि का क्षेत्रफल एक हेक्टेयर से अधिक है, जिस पर 36 हजार पौधों को रोपित किया जाएगा। इसे उपजाऊ बनाने में सदर रेंज ने पूरी ताकत लगा दी। डेढ़ माह तक चले सफाई अभियान के बाद मिट्टी पटाई, समतलीकरण, जुताई का काम भी पूरा हो गया है।
एक स्क्वायर मीटर में तीन से पांच पौधे
अब पौधारोपण के लिए गड्ढों की खोदान की जानी है। एक स्क्वायर मीटर में तीन से पांच पौधे लगाए जाएंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि जब यह जंगल तैयार हो जाएगा तो आसपास के लोगों को भी इसका भरपूर लाभ मिलेगा।
हरित आवरण बढ़ने के साथ शहर से सटा होने के कारण लोग यहां हरियाली के साथ भरपूर आक्सीजन का लाभ भी उठा सकेंगे। भविष्य में इसे पार्क के रूप में विकसित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। इस भूमि पर फलदार, इमारती और औषधीय पौधों की प्रजातियों को रोपित किया जाएगा, जिसका लाभ स्थानीय लोगों को भी मिलेगा।
पौधों की इन प्रजातियों का होगा रोपण
शीशम, सिरस, सागौन, अकेसिया, नीम, अमरूद, कचनार, जामुन, नींबू, आंवला, करौंदा, छितवन, सेमर, महोगनी, गोल्डमोहर, पिल्टोफार्म, गुटेल, अगस्त, कठ सागौन, गूलर, वाटलब्रश, पलाश, सहजन को शामिल किया गया है।
उस भूमि को जंगल के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है, जो कूड़ाघर से भी बदतर थी। वहां जाना तो दूर देखना भी कोई नहीं पसंद करता था लेकिन अब इसकी तस्वीर बदल रही है। इसी माह मियावाकी पद्धति से पौधारोपण कराकर इसे जंगल के रूप में तैयार किया जाएगा, जिसका आने वाले समय में व्यापक असर दिखाई देगा।
-रत्नेंद्र त्रिगुणायत, वन क्षेत्राधिकारी, सदर रेंज अयोध्या।
