अब एचआईवी संक्रमण का जोखिम बताएगा क्यूआर कोड, दस सवालों से मिलेगी पूरी जानकारी
अयोध्या में एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर पहचान के लिए क्यूआर कोड आधारित जोखिम आकलन सुविधा शुरू की गई है।

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
एचआईवी जोखिम आकलन के लिए क्यूआर कोड सुविधा शुरू।
दस सवालों के जवाब से संभावित जोखिम की पहचान।
जागरूकता बढ़ाना और समय पर उपचार सुनिश्चित करना।
नफीस खां, अयोध्या। एचआईवी/एड्स को लेकर समाज में आज भी कई भ्रांतियां और झिझक बनी हुई है। संक्रमण की आशंका होने के बावजूद लोग शर्म और डर के कारण जांच कराने या चिकित्सकीय परामर्श लेने से बचते हैं। इससे संक्रमण की पहचान में देरी होने की संभावना रहती है।
अब लोगों को समय रहते एचआईवी संक्रमण के संभावित जोखिम के प्रति जागरूक करने के लिए क्यूआर कोड आधारित जोखिम आकलन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संदीप शुक्ला ने बताया कि जनपद में करीब 1700 एचआईवी संक्रमित मरीज पंजीकृत हैं।
क्यूआर कोड आधारित जोखिम आकलन के माध्यम से अब तक 20 ऐसे लोगों की पहचान भी हो चुकी है,इन सभी को आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराते हुए उपचार शुरू कराया जा रहा है। एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी की ओर से क्यूआर कोड की सुविधा विकसित की गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्यूआर कोड को ग्राम पंचायतों और जागरूकता बैठकों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है, ताकि संक्रमण की आशंका वाले लोग समय रहते जांच और उपचार की सुविधा से जुड़ सकें।
मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद एक फार्म खुलेगा, जिसमें एचआईवी संक्रमण से जुड़े जोखिम को लेकर करीब 10 सवाल पूछे जाएंगे। व्यक्ति द्वारा सवालों के जवाब दर्ज करने के बाद उसे उसके संभावित जोखिम के संबंध में जानकारी मिल सकेगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी व्यक्ति की बीमारी का स्वयं निदान करना नहीं, बल्कि उसे जोखिम के प्रति जागरूक कर समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह के लिए प्रेरित करना है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जोखिम की जानकारी समय रहते मिलने से लोग बिना झिझक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर आवश्यक जांच और चिकित्सकीय परामर्श ले सकेंगे।
संक्रमण की पुष्टि होने की स्थिति में समय से उपचार शुरू होने से मरीज को बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन में मदद मिल सकती है। साथ ही एचआईवी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने में भी यह पहल उपयोगी साबित हो सकती है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रुदौली के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर रवीन्द्र शुक्ला ने बताया कि जल्द ही क्यूआर कोड सभी ग्राम पंचायतों में स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
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