स्वामी वरुणदास बोले- संतों को एक मंच पर लाए अशोक सिंघल, तभी साकार हो पाया राम मंदिर
स्वामी वरुणदास महाराज ने कहा कि विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल ने सनातन परंपरा के संत समाज को एक मंच पर लाकर श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक आधार दिया।
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HighLights
अशोक सिंहल ने विभिन्न संत परंपराओं को एक मंच पर एकजुट किया।
उनकी दूरदर्शिता से श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक आधार मिला।
अशोक सिंहल फाउंडेशन ने 35 को कृत्रिम अंग, 114 को चश्मे दिए।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अशोक सिंहल ने सनातन परंपरा के संत समाज को एक मंच पर लाकर श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक आधार दिया।
संतों को एक सूत्र में पिरोने का ही परिणाम है कि आज जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर साकार हुआ है। यह बात हनुमान टेकरी के स्वामी वरुणदास महाराज ने बुधवार को कारसेवकपुरम में अशोक सिंहल फाउंडेशन के कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर के निरीक्षण के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि शैव, वैष्णव, जैन, बौद्ध, कबीरपंथी, नानकपंथी, दादूपंथी और स्वामीनारायण सहित विभिन्न परंपराएं अलग-अलग थीं। अशोक सिंघल ने सभी को एक मंच पर लाने का करिश्मा किया। इसी एकजुटता से जन्मभूमि आंदोलन देशव्यापी बना।
उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष में चार लाख से अधिक लोगों ने प्राणों की आहुति दी और 76 युद्ध हुए। जन्मभूमि आंदोलन केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को संगठित करने और वंचित वर्गों तक सेवा पहुंचाने का भी माध्यम बना।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासी दिनेन्द्रदास, विहिप के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेशचंद्र, हनुमानगढ़ी के दिवेशाचार्य, अड़गड़ा मंदिर के सत्येंद्रदास, महांत महेशदास, ब्रह्मचारी, रामानुजदास, महेशदास, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की उपनिदेशक विनीता यादव और जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी चंद्रेश त्रिपाठी सहित संतों ने शिविर का निरीक्षण किया।
फाउंडेशन के समन्वयक मनोज तिवारी व शिखर ने उन्हें अंग निर्माण कार्यशाला और नेत्र परीक्षण की प्रक्रिया दिखाई।
35 को कृत्रिम अंग, 114 को चश्मे
शिविर के चौथे दिन 35 लाभार्थियों को कृत्रिम अंग व आवश्यक उपकरण दिए गए। इनमें 29 को कृत्रिम अंग और छह को हाथ वितरित किए गए। 118 लोगों का नेत्र परीक्षण हुआ, जिसमें 114 को चश्मे दिए गए।
