जागरण संवाददाता, औरैया: एक अगस्त की शाम से यमुना में एक बार फिर जल स्तर का बढ़ना शुरू हो गया है। सोमवार को दोपहर में स्थिर रहने के बाद शाम को फिर बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। तहसील प्रशासन बढ़ रहे जल स्तर पर अलर्ट मोड में है।

एक अगस्त की शाम से यमुना के जल स्तर में करीब ढाई मीटर की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। इसमें उत्तरोतर वृद्धि होती जा रही है। सोमवार को सुबह 10 बजे के बाद देर शाम तक जल स्तर बढ़ता रहा। बढ़ते जल स्तर को देखते हुए तहसील प्रशासन अलर्ट मोड में है। यमुना नदी के किनारे बसे गांवों में रह रहे लोगों को सजग किया गया है। बाढ़ का खतरा बढ़ने से उन्हें सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने का कार्य शुरू कराया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कोटा बैराज राजस्थान से चंबल में पानी छोड़े जाने के बाद जल स्तर में बढ़ोत्तरी हुई है। केंद्रीय जल आयोग के कुशल कार्य सहायक अंकुश चौहान ने बताया कि जल स्तर बढ़ता जा रहा है। यमुना में चेतावनी स्तर 112 मीटर तथा खतरे का निशान 113 मीटर पर है।

इस तरह बढ़ा जल स्तर

एक अगस्त की शाम छह बजे तक जल स्तर 105.06 मीटर। दो अगस्त की सुबह चार बजे 107.02 मीटर, चार घंटे बाद सुबह आठ बजे 107.70 मीटर, सुबह नौ बजे 107.75 मीटर, सुबह 10 बजे 107.80 मीटर, मध्याह्न 12 बजे 107.80 मीटर व रात नौ बजे जल स्तर 107.85 मीटर रहा।

नहर में निकाला गया गांव और खेतों में भरा पानी संवाद सूत्र, दिबियापुर: अछल्दा ब्लाक के आधा दर्जन गांव में बारिश का पानी भर जाने से सैकड़ों एकड़ जमीन में भरा पानी नहर में छोड़ दिया गया है। इससे गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। सिचाई विभाग ने ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए नहर का पानी रुकवाया था।

सोमवार को किसानों ने खेतों में भरा पानी नहर में छोड़ दिया। इससे पहले ग्रामीणों ने सिचाई विभाग को प्रार्थना पत्र देकर नहर में पानी कम कराए जाने की गुहार लगाई थी। कन्नो, मन्नो, आशा का पुरवा, गहेसर ,हीरा का पुरवा, पुरवा भूपति गांव के किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन में पानी की निकासी न होने से बारिश का पानी भर जाने से किसानों की फसलें डूब गई। पानी की निकासी न होने से खेतों में दोबारा धान की रोपाई भी नहीं हो पा रही है। गांव के किसान कैलाश दीक्षित, मूलचंद, रामौतार, बीरबल, सुंदर लाल, मेवा लाल, रमेश, होती लाल, रामलाल, राम बाबु मोती नाथ, राजू नाथ, बबलू नाथ, पप्पू नाथ, अजय नाथ, विजय नाथ समेत सैकड़ों किसानों ने सिचाई विभाग से नहर का पानी कम कर पानी निकला जाने की गुहार लगाई थी।

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