जागरण संवाददाता, औरैया: ब्लाक प्रोग्राम मैनेजर के साथ मिलकर कोरोना काल में करीब दो करोड़ रुपये का गबन करने के आरोप में घिरे सौ शैया जिला अस्पताल के तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं। तत्कालीन सीएमएस पर एफआइआर दर्ज कराने के लिए डीएम ने शासन से अनुमति मांगी है। वहीं,गबन की जांच जारी रखते हुए मिले साक्ष्यों के आधार पर चिकित्सा सेवा में संविदा पर लगे वाहनों की पड़ताल शुरू करा दी गई है। इसके अलावा 50 शैया संयुक्त जिला अस्पताल में पिछले एक साल में अलग-अलग मद से खर्च हुए बजट की जांच को लेकर शासन को पत्र भेजा गया है।

तत्कालीन सीएमएस डा. राजीव रस्तोगी व ब्लाक प्रोग्राम मैनेजर आदेश कुमार के कार्यकाल से जुड़ी फाइलों के पन्ने तेजी से पलटे जा रहे हैं। डीएम सुनील कुमार वर्मा ने अनियमितता को लेकर अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और फर्जी बिल लगाकर भुगतान के मामले में जीएसटी की हेराफेरी पर उपायुक्त वाणिज्य कर को पत्र लिखा है। इतना ही नहीं, आडिट में हुई जालसाजी को लेकर जिला लेखा प्रबंधक नितिन सरोज पांडेय की सेवाएं समाप्त करने के लिए भी शासन को पत्र लिखा गया है। उल्लेखनीय है कि मार्च 2021 में चिचौली स्थित सौ शैया संयुक्त जिला चिकित्सालय के निरीक्षण में डीएम को वित्तीय अनियमितता मिली थी। कोविड लेवल-2 अस्पताल के मद्देनजर बेड के चादरों की धुलाई के मद में नौ लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया था।दो वाशिग मशीन होने के बावजूद धुलाई के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान कैश कर दिया गया। उधर, शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर डा. राजीव रस्तोगी को कोविड-19 नोडल अधिकारी के पद से हटाकर चार्ज डा. प्रमोद कटियार को दिया गया। बावजूद डा. रस्तोगी ने चार्ज पूरी तरह से उन्हें नहीं दिया। इसकी भी जांच चल रही थी। ब्लाक प्रोग्राम मैनेजर आदेश कुमार के खिलाफ सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। जैसा कि जांच में पाया गया है कि तत्कालीन सीएमएस डा. रस्तोगी ने ब्लाक प्रोग्राम मैनेजर के साथ मिलकर वित्तीय वर्ष 2020-21 में मिले करीब एक करोड़ 68 लाख रुपये का भुगतान फर्जी बिल के माध्यम से उन्नाव की तीन फर्मों मैसर्स नमन इंटरप्राइजेज, मैसर्स शिवांगी इंटरप्राइजेज और काली इंटरप्राइजेज को कर दिया। गलत तरीके से बिल बनाकर भुगतान किए गए।

Edited By: Jagran