जागरण संवाददाता, औरैया : मातृ तथा शिशु मृत्यु दर को रोकने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। लेकिन जिला अस्पताल में जननियों को सुरक्षा देने के लिए बजट ही नहीं है। इससे यहां आने वाली महिलाएं मायूस होकर लौट रही हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा मातृ तथा शिशु मृत्यु दर को रोकने के लिए जननी सुरक्षा योजना चन रही है। इस योजना को संचालित करने का कारण था कि गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल में आएं। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 तथा शहरी क्षेत्र की महिलाओं को एक हजार रुपये देने का प्रावधान है। इन महिलाओं को अस्पताल में लाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में आशाओं को लगाया गया है। पिछले कुछ माह से जिला अस्पताल में बजट के अभाव से जननियों को सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। इस कारण यहां आने वाली महिलाएं मायूस होकर लौट रही हैं। आंखों पर नजर डालें तो एक अप्रैल 2017 से 28 फरवरी 2018 तक 2219 जिला अस्पताल में प्रसव हुए हैं। इनमें से 1539 महिलाओं को जननी सुरक्षा का लाभ मिला है। जबकि 680 महिलाएं इस लाभ से वंचित हैं। वहीं 2016-17 में जिला अस्पताल में 1856 प्रसव हुए। उनमें से 300 महिलाएं जननी सुरक्षा योजना के लाभ से वंचित रह गई थीं। यह महिलाएं अभी भी जिला अस्पताल के चक्कर काट रही हैं।

जिला अस्पताल के सीएमएस डा. हीरा ¨सह ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में 26.60 लाख रुपये बजट प्राप्त हुआ था। वह सभी को बांट दिया गया है। जैसे ही बजट मिलता है, सभी के खातों में योजना का पैसा भेज दिया जाएगा।

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