संवाद सहयोगी, अजीतमल (औरैया) : स्वास्थ्य विभाग डाक्टरों व कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। कुछ दवाओं से लोगों का इलाज करना डाक्टरों की मजबूरी बन रहा है। सीएचसी अजीतमल में महिला चिकित्सक नहीं है। इससे यहां आने वाली महिलाओं को रेफर कर दिया जाता है। एक महिला चिकित्सक की सीएचसी में तैनाती है। लेकिन कार्यभार ग्रहण करने के बाद से महिला चिकित्सक सीएचसी नहीं आईं। एएनएम के सहारे ही प्रसव कराए जा रहे हैं।

अजीतमल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कुल चार चिकित्सक तैनात हैं। इन चिकित्सकों में से एक इमरजेंसी में रहते हैं। तो कुछ मी¨टग या अन्य व्यवस्थाओं में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में कुल दो चिकित्सक ही मरीजों को ओपीडी में देख पाते हैं। सीएचसी में प्रतिदिन करीब ढाई सौ से तीन सौ तक मरीज पहुंचते हैं। एक डाक्टर को ओपीडी में कम से कम सौ मरीजों को देखना पड़ता है। सीएचसी मुख्य ओआरएस व पेट दर्द के लिये कोई दवा नहीं है। गर्भवती महिलाओं व प्रसूताओं के भोजन की व्यवस्था बदहाल है। वहां भर्ती प्रसूताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सुबह दस बजे सिर्फ दलिया दिया जाता है। खाना नहीं मिल रहा है। घर से खाना लाना पड़ता है। डाक्टरों की कमी को देखते हुये स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी में जनवरी महिला चिकित्सक डा. मोहिनी गुप्ता को तैनाती की है। लेकिन कार्यभार ग्रहण करने के बाद से आज तक वह कहां पर हैं इसकी जानकारी किसी को नहीं है। इससे सीएचसी में आने वाली महिला मरीजों को मजबूरी में चिकित्सकों को जिला अस्पताल या सैफई रेफर करना पड़ता है। सीएचसी अधीक्षक डा. विमल कुमार ने बताया कि डाक्टरों की कमी है। ओआरएस व पेट दर्द की दवा भी नहीं है। विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। विकल्प के तौर पर अन्य दवाओं से काम चलाया जा रहा है। डा. मोहिनी गुप्ता ने जनवरी में आकर ज्वाइन किया था। तबसे वह सीएचसी में नहीं आईं हैं। यहां से लगातार गैरहाजिर लिख कर भेजा जा रहा है। अभी उनका वेतन भी यहां से निर्गत नहीं किया जा रहा है।

By Jagran