जागरण संवाददाता, औरैया: प्रकृति की अनमोल धरोहरों को सहेजने का कार्य प्रशासन सिर्फ कागजों में कर रहा है। यही वजह है कि जल के प्रमुख संसाधनों में एक तालाब देखरेख के अभाव में सिकुड़ते जा रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के मुंह मोड़ने से तालाबों पर कब्जे भी तेजी से हो रहे हैं। जिले में सैकड़ों तालाब इस जद में हैं। बावजूद जिम्मेदार कुछ करने के बजाय कागजों में खानापूर्ति कर रहे हैं।

इसकी एक बानगी बेला के ग्राम पंचायत बर्रुकुलासर के मजरा ढिपारा स्थित तालाब है। जो गंदगी से पटा है। तालाब में गांव का गंदा पानी भरा होने से बेजुबान पशु-पक्षी भी इसका पानी नहीं पीते। सिचाई तो दूर की बात है।

जिले में नए तालाबों की खोदाई का कार्य किया जा रहा है। 112 स्थल इसके लिए चिह्नित किए गए हैं। वित्तीय स्वीकृति 96 तालाबों की है। 26 तालाबों को लेकर खोदाई कार्य मनरेगा के तहत शुरू भी करा

दिया गया है। लेकिन जो तालाब पहले से हैं, उनकी अनदेखी प्रशासनिक अधिकारी कर रहे हैं। जिस कारण तालाबों की दशा और भी ज्यादा खराब होती जा रही है। बेला के ग्राम पंचायत बर्रुकुलासर के मजरा ढिपारा स्थित तालाब पर जगह-जगह कब्जे हैं। इसके अलावा तालाब की सफाई न होने से गंदा पानी भरा हुआ है। इस बाबत ग्राम सचिव अरविद कुमार का कहना है कि अभी कार्ययोजना जारी

नहीं हुई है। जल्द तालाब में स्वच्छ पानी भरवाया जाएगा। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है जिन तालाबों पर कब्जे हैं, उन्हें कब्जा मुक्त कराया जाएगा। इसके लिए तहसीलवार टीमें बनाई गई हैं। उनसे आख्या मांगी जाएगी।

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