जागरण संवाददाता, औरैया: शादी के करीब 15 साल बाद सर्वेश को मन्नतों के बाद संतान सुख मिला। खुशी इतनी थी कि मन में न समाए। लेकिन यह खुशी एक ही दिन में उस समय चिता में बदल गई जब पता चला कि बच्ची के मल का रास्ता बंद है। वह मूत्र के रास्ते से मल त्याग रही है। भगवान के अलावा अब कोई सहारा न था जो इस संकट से छुटकारा दिला सके। फाकाकशी के दौर में मजदूरी करने वाले सर्वेश के पास इतने रुपये नहीं थे कि वह उसका ऑपरेशन करा सके। आयुष्मान योजना की जानकारी होने पर उसने गोल्डनकार्ड बनवाकर कानपुर मेडिकल कॉलेज में निश्शुल्क ऑपरेशन कराया और देखते ही देखते दामिनी के जीवन में खुशियों का उजाला भर गया।

बिधूना क्षेत्र के गांव दोणापुर निवासी सर्वेश कुमार के पास कच्चा मकान है और आर्थिक स्थिति दयनीय है। वह किसी प्रकार मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करते हैं। बीती 21 जुलाई को पत्‍‌नी शारदा देवी ने दामिनी को जन्म दिया। डिस्चार्ज होने के बाद बच्ची घर आई तो मां ने उसे गोद लिया। तब पता चला कि दामिनी पेशाब के रास्ते से ही मल कर रही है और साथ में खून आ रहा।

पिता सर्वेश को किसी ने इटावा के जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परेशान सर्वेश वहां गए पर कोई रास्ता नहीं निकला। हर जगह प्राइवेट ऑपरेशन की बात कही गई। लेकिन तंगहाली के चलते यह संभव नहीं था। अस्पतालों के चक्कर काटते-काटते दो महीने बीत गए। एक दिन वह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिधूना पहुंचे। वहां कुछ लाभार्थी आपस में आयुष्मान भारत योजना पर बात कर रहे थे कि इससे मुफ्त इलाज कराया जा सकता है। केंद्र में आयुष्मान के जिला समन्वयक डॉ. ज्योतींद्र मिश्रा से सर्वेश की मुलाकात हुई। जिस पर ज्योतिद्र ने उसका गोल्डन कार्ड बनवाया। कृष्णा हॉस्पिटल से उसे कानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। यहां सात अक्टूबर को सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आरके त्रिपाठी ने दामिनी की सफल सर्जरी की। डॉ. त्रिपाठी ने बताया था कि बच्ची को इम्परफोरेट ऐनस था। 15 दिन में वह समान्य तरीके से जिंदगी बिताने लगेगी।

Posted By: Jagran

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