संवादसूत्र,मुरादगंज: रमजान का महीना अल्लाह की रहमतों और बरकतों का महीना है। रमजान के महीने में अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ करता है। दलेलनगर के काजी मोहम्मद लहीक ने बताया कि रमजान सब्र का महीना है और सब्र का इनाम जन्नत है। रोजा इंसान की अहम इबादत है। रोजा व्यवहार इंसाफ और इंसानियत का सवाब देता है और इस महीने का हर लम्हा बहुत कीमती है । इस महीने में गरीबों का खयाल रखना चाहिए और इस महीने में नफलो का सवाब फर्ज के बराबर है। इस महीने में तीन अशरों का सबाव है, पहला अशरा रहमतों का दूसरा गुनाहों की मगफिरत का और तीसरा अशरा जो चल रहा है यह जहन्नुम की आग से निजात का अशरा है और हर इंसान पर उसके मालिक की तरफ़ से फितरा वाजिब है। इस महीने में कुरआन नाजिल हुआ, इस महीने में अल्लाह अपने नेक बंदों की दुआएं कबूल फ़रमाया है।

Posted By: Jagran

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