संवाद सहयोगी, जालौन : ग्रामीणों को होम्योपैथिक से जोड़ने के लिए ग्राम जगनेवा में होम्योपैथिक चिकित्सालय की स्थापना 3 दशक पूर्व की गई थी। चिकित्सक की नियुक्ति होने के बाद भी चिकित्सालय भगवान भरोसे चल रहा है। कब खुलेगा कब बंद हो जाएगा किसी को पता नहीं चलता है।

गांव के बीमार लोगों का उपचार गांव में ही मिले तथा बच्चों को दवा खाने में सहूलियत रहे। ग्रामीणों को होम्योपैथिक चिकित्सा से जोड़ने के लिए ग्राम जगनेवा में 13 अक्टूबर 1992 में होम्योपैथिक चिकित्सालय की स्थापना की गई थी। चिकित्सालय के संचालन के लिए डॉ. प्रियंका की नियुक्ति की गई है। इनकी सहायता के लिए फार्मासिस्ट को अटैच किया गया है। चिकित्सालय में 2 लोगों की नियुक्ति होने के बाद भी अस्पताल समय से नहीं खुलता है और समय से पहले ही बंद हो जाता है। चिकित्सक की मनमर्जी से चल रहे चिकित्सालय का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सक की मनमर्जी का आलम यह है कि वह बगैर आधार कार्ड के मरीजों को दवा ही नहीं देते हैं। ग्रामीण जीतू शिकरवार, मनोज दोहरे, सौरभ, प्रमोद पाल, नीतू कहते हैं कि चिकित्सालय प्रतिदिन नहीं खुलता है। जब खुलता है तो समय से नहीं खुलता है। 11 से 12 बजे के बीच चिकित्सालय खुलता है और 2 बजे बंद हो जाता है।

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चिकित्सक को निर्देश दिए हैं कि वह आधार कार्ड न होने के बाद भी मरीजों को दवा दें तथा चिकित्सालय को समय पर खोलना सुनिश्चित करें। अगर शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. अभिषेक सिह, जिला होम्योपैथी चिकित्साधिकारी

Edited By: Jagran