गंगा की सहायक नदी पर दबंगों का 'बुलडोजर कब्जा': 30 KM लंबी यगद नदी का मिटा दिया नामोनिशान!
हसनपुर तहसील में गंगा की सहायक यगद नदी पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है, जिससे नदी का नामोनिशान मिट ...और पढ़ें

फत्तेपुर खादर गांव के पास यगद नदी में लहलहाती फसलें। जागरण
संवाद सहयोगी, हसनपुर (अमरोहा)। तहसील क्षेत्र में गंगा की सहायक नदी यगद पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है। नदी के पूरे रकबे को जोतकर खेतों में मिला लिया है और उस पर फसलें बो दी हैं। जिसकी वजह से नदी का नामोनिशान मिट गया है। दो साल पहले करीब दस किमी तक नदी की खोदाई प्रशासन द्वारा कराई गई थी। लेकिन, सूखी होने की वजह से लोगों ने फिर से उस पर कब्जा कर लिया है।
हसनपुर तहसील क्षेत्र में बगद और यगद दो नदियां मां गंगा की सहायक नदी कहलाती हैं। पुराने जमाने में क्षेत्र के लोग इन नदियों में नहाने के साथ ही धार्मिक अनुष्ठान भी किया करते थे।
यगद नदी शाहपुर कला के नजदीक कालका से शुरू होकर झुंडी माफी, कनैटा, रूद्रपुर, कंडौवा, फत्तेपुर खादर, निरयावली, भीमा सुल्तानपुर, ओगपुरा होते हुए आदमपुर से आगे चलकर संभल जनपद में प्रवेश करती है।
इस नदी की हसनपुर तहसील क्षेत्र में लंबाई तीस किमी से अधिक तथा चैड़ाई करीब छह मीटर की है। दो वर्ष पहले बगद नदी की खोदाई के साथ ही जिला प्रशासन ने यगद नदी की खोदाई का कार्य भी शुरू कराया था।
मगर, करीब दस किमी तक खोदाई का कार्य पूरा होने के बाद बारिश का मौसम शुरू होने पर खोदाई का कार्य बीच में अटक गया था। नदी के करीब 20 किमी भाग में अधिकतर रकबे पर किसानों ने नदी के पूरे रकबे को जोतकर खेतों में मिला लिया और खेती की जा रही है।
उधर नदी की खोदाई पूरी न होने की वजह से इसमें बारिश का पानी भी एकत्र नहीं हो सका था। लोग लंबे समय से बगद नदी को अवैध कब्जा मुक्त कराने की मांग कर रहे हैं।
नदी के रकबे पर अवैध कब्जा करने की किसी को इजाजत नहीं है। यगद नदी की पैमाइश कराकर अवैध कब्जा मुक्त कराया जाएगा। इसके बाद नदी की खोदाई के कार्य को पूरा कराया जाएगा।
- हिमांशु उपाध्याय, एसडीएम हसनपुर।
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