अमरोहा : वह बचपन से ही अखबारों में पढ़ती थी कि आइएएस व आइपीएस का रुतबा अलग ही होता है। उनके हाथ व कलम में ऐसी ताकत होती है जिससे वह समाज के भले के लिए कुछ भी कर सकते हैं। आज खुद उनकी कतार में आकर खड़ी हुई तो कुछ अलग करने के सपने बुनना शुरू कर दिए हैं। संविधान द्वारा दी गई ताकत का सदुपयोग कर नारी सशक्तीकरण व गांव-शहर के अंतर को खत्म करना प्राथमिकता बना लिया। अब उनकी चाहत है कि हर बेटी सदफ बने तथा पढ़ लिख कर आगे बढ़े। कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं होता। इंटरनेट से सबकुछ आपके हाथ में है। यह बात यूपीएससी में देशभर में 23वीं रैंक हासिल करने वाली जोया की बेटी सदफ चौधरी ने दैनिक जागरण से अपने गुजरे व आने वाले कल के बारे में बेबाकी से कही।

प्रश्न-सिविल सर्विस में जाने की क्या योजना थी?

उत्तर-बचपन से ही अखबार में डीएम व एसपी के बारे में खबरें पढ़ती थी व फोटो देखती थी तो सोचती थी कि इनके हाथ में कितनी ताकत है। उनका अलग ही रुतबा होता है। दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद ही सिविल सर्विस में जाने का मन बना लिया था। प्रश्न-इस सफलता तक पहुंचने में स्वजन का कितना योगदान रहा।

उत्तर-मेरे वालिद व वालिदा ने कभी मुझे यह नहीं कहा कि बेटा यह मत करो, वह मत करो। हमेशा उन्होंने आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मेरी छोटी बहन सायमा चौधरी ने हमेशा मुझे हिम्मत दी। हर परीक्षा के दौरान वह मेरे साथ घर से गई। अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चों को उनकी इच्छा से आगे बढ़ने दें। प्रश्न-यूपीएससी की तैयारी किस प्रकार की, क्या कठिनाई सामने रहीं।

उत्तर-चूंकि 10वीं के बाद से ही मेरे दिमाग में सिविल सर्विस थी। लिहाजा 12वीं पास करने के बाद एनआइटी जालंधर में प्रवेश लिया। स्नातक कर दो साल नौकरी भी की। घर ही 12 घंटे तक पढ़ाई की। जब लक्ष्य सामने होता है तो कोई दिक्कत नहीं आती। उसे पूरा करने का जुनून सबकुछ आसान बना देता है। प्रश्न-कोचिग क्यों नहीं की, किस से प्रेरणा मिली।

उत्तर-मुझे कोचिग की जरूरत ही महसूस नहीं हुई। राजनीति शास्त्र व अंतरराष्ट्रीय संबंध मेरे विषय रहे। आज के दौर में सबकुछ इंटरनेट पर मौजूद है। लिहाजा जिस विषय पर भी जानकारी की जरूरत हुई इंटरनेट से हासिल कर ली। मेरी प्रेरणा मेरा जुनून व परिवार रहे हैं। प्रश्न-युवा वर्ग के लिए क्या संदेश देंगी।

उत्तर-किसी भी काम को पूरा करने के लिए पहले एक लक्ष्य निर्धारित करें। उसके बाद उसे पूरा करने के लिए मेहनत करेंगे तो कोई भी मुकाम आसानी से पाया जा सकता है। एक बार की विफलता से हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है। प्रश्न-भविष्य की क्या प्राथमिकता रहेगी।

उत्तर-अल्लाह का शुक्र है कि आज मैं एक मुकाम पर पहुंच गई हूं। मेरी प्राथमिकताओं में नारी सशक्तीकरण को बढ़ावा देना व गांव-शहर के अंतर को खत्म करना है। शहरों की तरह गांव भी विकास करें। मैं चाहती हूं कि हर बेटी सदफ बने और आगे बढ़े।

Edited By: Jagran