अमरोहा, जेएनएन। इश्क के नशे में परिवार के सात लोगों का नरसंहार करने के बाद शबनम ने मुरादाबाद जेल में 13 दिसंबर 2008 को बेटे को जन्म दिया था। उसका नाम मुहम्मद ताज रखा गया है। छह साल सात माह 21 दिन मां के साथ जेल में काटने के बाद बाल कल्याण समिति अमरोहा ने बेटे को जेल के बाहर की परवरिश एवं शिक्षा के लिए हसनपुर तहसील क्षेत्र निवासी उस्मान को 30 जुलाई 2015 को सौंपा था। बुलंदशहर में रहकर करीब पांच साल से उस्मान सैफी शबनम के बेटे के पालनहार बने हैं। बेटे की शिक्षा बुलंदशहर के एक स्कूल में चल रही है। इस वर्ष वह कक्षा चार में हैं। संरक्षक उस्मान सैफी समय समय पर बेटे को उसकी मां शबनम से जेल में जाकर मिलवाते रहे हैं। बुलाने पर बाल कल्याण समिति के समक्ष भी बेटे को लेकर पेश होते रहे हैं। बेटे की बेहतर परवरिश के लिए पिछले वर्ष उस्मान सैफी को बुलंदशहर में सम्मानित भी किया जा चुका है। उस्मान के मुताबिक बेटे को मां शबनम से मिले हुए करीब चार महीने का समय बीत चुका है। अब शबनम का बेटा संरक्षक उस्मान सैफी व उनकी पत्नी से काफी घुल मिल गया है। 

तत्कालीन एसपी ने आर्थिक मदद पर लगवा दी थी रोक

बावनखेड़ी कांड ने न सिर्फ सामाजिक तानाबाना उलझा दिया था बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी भूचाल ला दिया था। उस समय प्रदेश में बसपा सत्ता में थी और मायावती मुख्यमंत्री। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को रातों-रात उठा कर सरकार को घेरने की कोशिश की थी। जमकर राजनीति शुरू हो गई थी। लिहाजा घटना के तीसरे दिन मुख्यमंत्री मायावती बावनखेड़ी पहुंच गई थीं। वह शबनम से मिली थीं और सांत्वना दी थी। उन्होंने शबनम को 'बेचारीÓ समझ कर पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का एलान किया था लेकिन, पुलिस के जहन में कुछ और ही चल रहा था। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने मुख्यमंत्री से आग्रह कर उस समय आर्थिक मदद पर रोक लगवा दी थी। 

पुलिस को पढ़ाई जा रही है बावनखेड़ी कांड की केस स्टडी

बावनखेड़ी की खलनायिका के रूप में बदनाम हो चुकी शबनम व उसके प्रेमी द्वारा अंजाम दी गई घटना को अब पुलिस कर्मी प्रशिक्षण के दौरान पढ़ रहे हैं। बावनखेड़ी केस का सफल अनावरण तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक आरपी गुप्ता ने किया था। इस अनवारण के लिए उन्हें शासन स्तर पर भी सम्मानित किया जा चुका है। इतना ही नहीं बावनखेड़ी केस स्टडी को फिलहाल मुरादाबाद स्थित पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान पुलिस कर्मियों को पढ़ाया जा रहा है। 

चाचा सत्तार संभाल रहे हैं घर

 भाई शौकत के परिवार की हत्या के बाद इकलौती जीवित बची बेटी शबनम को जेल जाने के बाद संपत्ति की देखरेख चाचा सत्तार सैफी कर रहे हैं। जिस मकान में यह हत्याएं हुई थीं उसे शौकत ने बंद कर रखा है। अभी तक कमरों में ताले लगे हैं। जबकि सत्तार सैफी व उनका परिवार घर के पीछे बने कमरों में रहते हैं। सारे परिवार की कब्रें भी घर के परिसर में बनी हुई हैं। 

 

Posted By: Narendra Kumar

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