दैनिक जागरण की संस्कारशाला से बच्चों को अच्छाई की समझ होती है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में मित्र जरूर होते हैं लेकिन हमें मित्रता करते हुए अच्छे बुरे की समझ का होना जरूरी है। एक ऐसा मित्र ही मित्र कहलाने योग होता है, जो अपने मित्र को कुपंथ से हटाकर सुपंथ की ओर ले जाते हैं। इसलिए मित्रता करते समय हमें अच्छाई की समझ का होना जरूरी है। मित्र वही है जो एक संत की तरह उसकी बुराइयों को छिपाने और गुणों को सार्वजनिक करने का पुण्य कार्य करें। कर्ण यदि चाहता तो वह दुर्योधन को भी अपनी निजी धातुगत चरित्र संपदा की ओर मोड़ सकता था, परंतु उसने मित्रता का बिल्कुल उल्टा अर्थ जीवन में स्वीकार कर लिया। अपने एवं मित्र दुर्योधन के विनाश का कारण भी बन गया। उधर सच्ची मित्रता का कार्य श्रीकृष्ण ने कौनतेय अर्जुन के साथ किया। न केवल उनको मोह से ऊपर उठाया, बल्कि धर्म युद्ध में प्रवृत्त करके ज्ञान, भक्ति, कर्म और सन्यास का उपदेश देकर ऐसी दिव्यता दे दी, जिसके कारण पांडवों से जीवन में कोई अनैतिक कृत्य कभी नहीं हुआ। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ने अपने मित्र विभीषण और अर्जुन को मित्र बनाकर उनका दुख तो हर ही लिया, पर न तो श्रीराम ने लंका पर राज्य किया और न ही श्रीकृष्ण ने हस्तिनापुर पर। मित्र का तात्पर्य है जो जीवन में मिठाई की तरह मिठास और इत्र की तरह चरित्र की सुगंध भर दे वही मित्र एक सच्चे मित्र कहलाने के योग होते हैं। दैनिक जागरण देश विदेश एवं क्षेत्र की विश्वसनीय खबरें उपलब्ध कराने के साथ ही बच्चों को संस्कारशाला के माध्यम से बेहतर संस्कारवान बनने के लिए जागरूक भी कर रहा है। बच्चों को समय निकालकर दैनिक जागरण अखबार में प्रकाशित संस्कृति से संस्कार जरूर पढ़ने चाहिए, इनसे बच्चों को अच्छे संस्कार, संस्कृति, व्यवहार, सफलता के बारे में सीखने का मंत्र मिलता है।

ब्रह्मदत्त त्यागी, निदेशक, चौधरी बिहारी सिंह त्यागी कन्या इंटर कालेज, रहरा।

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