अमरोहा: कोरोना के संक्रमण के कारण तमाम बच्चों के सिर से मां-बाप का साया उठ गया। ऐसे बच्चों का सरकार सहारा बनेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना शुरू की है। अभी तक जनपद में 15 बच्चों ने योजना के तहत आवेदन किया है। इनके सत्यापन की कार्रवाई प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शुरू कर दी गई है।

कोरोना के संक्रमण ने लोगों के हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया। जनपद में कई बच्चे अनाथ हो गए हैं। ऐसे 15 बच्चों को जिला प्रोबेशन विभाग ने चिह्नित किया है और योजना के लाभ को आवेदन भरवाए हैं। दो दिन के भीतर इनके सत्यापन की कार्रवाई पूरी कराई जाएगी। इनमें सबसे अधिक पांच अनाथ बच्चे मंडी धनौरा ब्लाक क्षेत्र के गांवों के रहने वाले हैं। इसके अलावा जोया व अमरोहा ब्लाक क्षेत्र के तीन-तीन, गंगेश्वरी का एक, नौगावां सादात क्षेत्र का एक व अमरोहा शहर के दो बच्चे हैं। योजना से लाभान्वित किए जाने वाले बच्चों की तीन श्रेणियां

- 0 से 18 साल की उम्र तक के ऐसे सभी बच्चे जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु कोविड-19 के संक्रमण से हुई हो या जिनके माता व पिता में से एक की मृत्यु 1 मार्च 2020 से पूर्व हो गई थी तथा दूसरे की मृत्यु कोविड-19 के संक्रमण के दौरान हुई हो या फिर जिनके माता व पिता दोनों की मृत्यु 1 मार्च 2020 से पूर्व हो गई थी, उनके वैध संरक्षक की मृत्यु कोविड-19 के संक्रमण से हो गई हो।

- ऐसे बच्चे जिन्होंने कोरोना के कारण अपने माता-पिता में से आय अर्जित करने वाले अभिभावक को खो दिया हो तथा वर्तमान में जीवित माता या पिता सहित परिवार की आय दो लाख रुपये प्रतिवर्ष से अधिक न हो।

- कोविड-19 से मृत्यु के साक्ष्य के लिए एंटीजन या आरटीपीसीआर की प्लस वीई टेस्ट रिपोर्ट, ब्लड रिपोर्ट या सीटी स्कैन में कोविड-19 का इंफेक्शन होना माना जा सकता है। कोविड-19 का पेसेंट कतिपय परिस्थितियों में टेस्ट में निगेटिव आने के बाद भी पोस्ट कोविड कंपलीकेशन से उसकी मृत्यु हो सकती है। यह मृत्यु भी कोविड-19 की वजह से ही मानी जाती है। यह मिलेगा योजना का लाभ

-0-10 साल तक की आयु के बच्चों के वैध संरक्षक के बैंक खाते में चार हजार रुपये प्रतिमाह की धनराशि देय होगी बशर्ते औपचारिक शिक्षा के लिए उनका पंजीयन किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में कराया गया हो। इसके अतिरिक्त ऐसे बच्चे जो पूर्णतया अनाथ हो गए हों एवं बाल कल्याण समिति के आदेश से उनको बाल्य देखभाल संस्थाओं में आवासित कराया गया हो, उनको कक्षा 6 से 12 तक की शिक्षा के लिए अटल आवासीय विद्यालयों व कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रवेशित कराया जाएगा। 11 से 18 साल तक की उम्र के बच्चों की कक्षा 12 तक की निश्शुल्क शिक्षा रहेगी।

- अगर बच्चों के संरक्षक उनको आवासीय स्कूलों में प्रवेश नहीं दिलाना चाहते हों तो बच्चों की देखरेख व शिक्षा के लिए उनको 18 साल की आयु होने या कक्षा 12 तक की शिक्षा पूरी होने तक चार हजार रुपये की धनराशि दी जाएगी। बशर्ते बच्चे को औपचारिक शिक्षा के लिए अनिवार्य रूप से किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में प्रवेश दिलाया गया हो।

- सरकार ऐसी सभी बालिकाओं की शादी के लिए एक लाख एक हजार रुपये उपलब्ध कराएगी। कक्षा 9 या इससे ऊपर की कक्षा में अथवा व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त कर रहे 18 वर्ष तक के बच्चों को टेबलेट/लैपटाप की सुविधा एक बार देगी। वैध संरक्षक का चिन्हांकन जनपद स्तरीय टास्क फोर्स द्वारा किया जाएगा और वह ऐसे प्रकरण का अनुश्रवण भी करेगी।

-- जिला बाल संरक्षण इकाई व बाल कल्याण समिति द्वारा उपरोक्त बच्चों के शिक्षा, पोषण, शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य आदि के संबंध में निरंतर फालोअप किया जाएगा। योजना के लाभ की यह है प्रक्रिया

- जिन बच्चों के माता-पिता की मृत्यु हो गई, ऐसे सभी चिह्नित बच्चों या उनके अभिभावकों से जिला बाल संरक्षण इकाई तथा बाल कल्याण समिति सीधे संपर्क कर उनके आवेदन पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया को 15 दिन के अंदर पूर्ण कराएगी। जिला स्तरीय टास्क फोर्स उसका पर्यवेक्षण करेगी।

-- ऐसे बच्चे (10 वर्ष से अधिक आयु के) स्वयं/ संरक्षक ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन ग्रामीण क्षेत्रों में बीडीओ/वीडीओ के पास या विकास भवन में डीपीओ कार्यालय में तथा शहरी क्षेत्र में अपने क्षेत्र के लेखपाल के पास या तहसील में जमा कर सकते हैं।

माता-पिता/ माता या पिता की मृत्यु से दो साल के भीतर आवेदन करना अनिवार्य होगा। किसी भी बच्चे को अनुमोदन की तिथि से लाभ अनुमन्य होगा। आवेदनों का सत्यापन ग्रामीण क्षेत्र में बीडीओ व शहरी में एसडीएम द्वारा किया जाएगा।

डीपीओ सभी सत्यापित आवेदनों को जिला स्तरीय टास्क फोर्स के समक्ष पेश करेंगे। टास्क फोर्स की गतिविधियों, योजना से संबंधित समस्याओं व शिकायतों आदि के निराकरण के संबंध में रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष योजनांतर्गत गठित राज्य अनुश्रवण समिति द्वारा उसका अनुश्रवण किया जाएगा। आवेदन के लिए ये दस्तावेज जरूरी

पूर्ण आवेदन पत्र बच्चे व वर्तमान अभिभावक के नवीनतम फोटो सहित। माता/पिता दोनों जैसी भी हो मृत्यु प्रमाण पत्र। बच्चे की आयु का प्रमाण पत्र। परिवार रजिस्टर की नकल अथवा किसी सरकारी दस्तावेज की प्रति जिसमें आयु का उल्लेख हो। शिक्षण संस्थान में पंजीयन का प्रमाण पत्र। उप्र के निवासी होने का घोषणा पत्र। आय प्रमाण पत्र (माता व पिता दोनों की मृत्यु होने की स्थिति में आवश्यक नहीं)। अभी 15 ऐसे बच्चे चिह्नित किए गए हैं जिनके माता-पिता की मृत्यु कोरोना संक्रमण से हुई है। योजना का लाभ दिलाने के लिए उनके आवेदन पत्र भरवाए गए हैं। दो दिन में जांच कराकर प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया जाएगा।

मनोज कुमार यादव, प्रभारी डीपीओ।

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