अमरोहा : कोरोना काल में हर कोई किसी न किसी रूप में दुश्वारियों से जूझा है। लॉकडाउन के चलते बाहर निकलने पर भी पाबंदी थी। ऐसे में नौकरशाह सेवादार की भूमिका में थे। इनमें से कई सरकारी इमदाद से इतर जरूरतमंदों की मदद कर खास छाप छोड़ दी। इनमें ही अमरोहा के तत्कालीन एसडीएम विवेक यादव का नाम शुमार है। इन्होंने न सिर्फ गरीबों के घर तक दो वक्त का खाना पहुंचवाया बल्कि, जरूरतमंदों को दूध और दवाइयां भी उपलब्ध कराकर उनका दिल जीत लिया।

मार्च में लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद उन लोगों के लिए जिदगी जंग बन गई थी जिनकी जीविका दिहाड़ी मजदूरी पर आश्रित थी। उनके सामने तो जिदा रहने की चुनौती खड़ी हो गई जो दवाओं के भरोसे बसर कर रहे थे। लॉकडाउन शुरू होते ही शासन ने गरीबों को खाना मयस्सर करवाने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौंपी थी। जिलाधिकारी उमेश मिश्र भी इसको लेकर चितित थे। उन्होंने जिले के चारों एसडीएम को हर उस घर तक दोनों वक्त का भोजन पहुंचाने का आदेश दिया था जिनके घर आर्थिक तंगी के चलते चूल्हे नहीं जल पा रहे थे।

इसी क्रम में अमरोहा के तत्कालीन एसडीएम विवेक यादव ने भी अमरोहा में चार स्थानों पर रसोई शुरू कराई थी। इसमें उन्होंने कई समाजसेवियों का भी सहयोग लिया। जरूरतमंदों तक प्रतिदिन खाने के नौ सौ पैकेट पहुंचाए जा रहे थे। इसी दौरान डायल-108 व आपदा कंट्रोल रूम से अलग-अलग शिकायतें आनी शुरू हो गईं। पता चला कि कई परिवार बच्चों के लिए दूध न मिलने के कारण परेशान हैं, तो कुछ को लॉकडाउन के चलते दवाएं मयस्सर नहीं हो पा रहीं। इससे उनकी जिदगी पर खतरा मंडराने लगा है।

ऐसी सूचना पर एसडीएम ने कोतवाली प्रभारी रविद्र सिंह को एक घर में भेजा। वहां देखा तो पता चला कि डायबिटीज की दवा न मिलने के कारण गृहस्वामी की स्थिति नाजुक हो गई थी। सूचना मिलते ही एसडीएम ने आठ सौ रुपये की दवा खरीदकर उसके घर तक पहुंचवाई। ऐसी शिकायतें और बढ़ने पर उन्होंने औषधि निरीक्षक राजेश की मदद से हर जरूरतमंद के घर तक दवाएं पहुंचवाईं। साथ ही जरूरतमंदों के घर चिह्नित कर समाजसेवियों की मदद से दूध पहुंचाकर बच्चों को भी भूखा रहने से बचा लिया। मुंह पर अंगौछा बन गया था विशेष पहचान

अमरोहा : कोरोना काल शुरू होने के बाद जहां हर कोई मास्क लगाए नजर आ रहा था वहीं तत्कालीन एसडीएम विवेक यादव मुंह पर अंगौछा लपेटे फील्ड में नजर आते थे। पहले तो कई लोगों ने इसको लेकर उनका मजाक भी बनाया। अंगौछा उनकी पहचान बन गया था। तभी प्रधानमंत्री मोदी ने टीवी पर अंगौछा लगाने की सलाह दे दी। इसके बाद कई अन्य अधिकारी भी अंगौछा के साथ नजर आने लगे थे।

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