अमरोहा, जेएनएन। इश्क में अंधी हुई शबनम की आंखे हमेशा के लिए बंद होने की घड़ी धीरे-धीरे नजदीक आ रही है। उसके लिए अब सभी कानूनी रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं। रिव्यू पिटिशन खारिज होने के बाद यह लगभग तय हो गया है कि अपने परिवार के सात लोगों की कातिल शबनम को फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। वह आजादी के बाद फांसी पर लटकने वाली देश की पहली महिला होगी। उसे प्रदेश की मथुरा जेल में फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। 

यह है मामला 

बीती 14 अप्रैल 2008 की रात को हसनपुर के गांव बावनखेड़ी में गांव के ही प्रेमी सलीम के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों की हत्या करने वाली परिवार की इकलौती बेटी शबनम को उसके किए गुनाह की सजा दिए जाने की घड़ी संभवत अब करीब ही है। देशभर को दहला देने वाली इस घटना को 12 साल बीत चुके हैं। शबनम मुरादाबाद जेल से रामपुर जेल भेज दी गई। जबकि प्रेमी सलीम को मुरादाबाद की जेल से आगरा शिफ्ट किया जा चुका है। अपने बचाव में स्थानीय अदालत के बाद हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लडऩे वाली शबनम व उसके प्रेमी को हर जगह से मौत की ही सजा मिली है। शबनम ने राष्ट्रपति से भी माफी की गुहार लगाई थी। परंतु वर्ष 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी दया याचिका को खारिज कर चुके हैं। अब अदालत ने उसकी रिव्यू पिटिशन भी खारिज कर दी है। यानि शबनम का फांसी के फंदे पर लटकना लगभग तय हो गया है। महिला दोषी को फांसी दिए जाने के मामले में शबनम आजादी के बाद देश की पहली महिला होगी। क्योंकि आजादी के बाद से अभी तक देश में किसी महिला को फांसी के फंदे पर नही लटकाया गया है। प्रदेश में महिला को फांसी दिए जाने की व्यवस्था केवल मथुरा जेल में है। फिलहाल शबनम रामपुर जेल में बंद है। उसका डेथ वारंट आने के बाद रामपुर जेल प्रशासन को उसे मथुरा जेल शिफ्ट करना होगा।

फांसी पर लटकने वाली पहली महिला होगी शबनम 

आजादी के बाद शबनम देश की पहली महिला होगी जिसे फांसी की सजा मिलेगी। प्रदेश में केवल मथुरा जेल में ही महिला को फांसी दिए जाने की व्यवस्था है। सेशन कोर्ट से डेथ वारंट मिलने के बाद ही उसे प्रक्रिया के तहत मथुरा जेल भेजा जाएगा।

-पीडी सलोनिया, जेल अधीक्षक रामपुर। 

 

Posted By: Narendra Kumar

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