चोरी की बिजली से चार्ज कर ठेके पर दौड़ा रहे ई-रिक्शा

जेएनएन, अमरोहा: ई-रिक्शा संचालन में बड़ा खेल किया जा रहा है। नियमानुसार ई-रिक्शा खरीदने वाले को पोर्टेबल चार्जर मिलता है। नियम के अनुसार रिक्शा को घरेलू बिजली से चार्ज नहीं किया जा सकता। जबकि किसी भी चालक के घर व्यवसायिक कनेक्शन नहीं है। अमरोहा में गैराज बनाकर कुछ लोग ई-रिक्शा को चोरी की बिजली से अवैध रूप से चार्ज कर रहे हैं। वहीं ठेके पर भी ई-रिक्शा दिए जा रहे हैं। बिजली विभाग के रिकार्ड के मुताबिक जिले में 20 हजार 149 व्यवसायिक कनेक्शन हैं। जबकि ई-रिक्शा की संख्या ही 10 हजार से अधिक है। इन आंकड़ों से साफ जाहिर है कि बड़े पैमाने पर जिले में ई-रिक्शा चार्ज करने के लिए बिजली चोरी की जा रही है। शहर की सड़कों पर जाम का सबब बने ई-रिक्शा चोरी की बिजली से चार्ज किए जा रहे हैं। नियमानुसार ई-रिक्शा की बिक्री व संचालन व्यवसाय की श्रेणी में आता है। ऐसे में इसे चार्ज करने के लिए भी बिजली विभाग से व्यवसायिक कनेक्शन लेना अनिवार्य होता है। परंतु ऐसा नहीं हो रहा है। नगर में 12 स्थान पर ऐसे गेराज खुले हुए हैं जहां पर रात को 80 रुपये से लेकर 100 बैट्री चार्ज की जाती है। हालांकि इन गेराज में दो ऐसे भी हैं जहां पर सोलर प्लांट लगा है। परंतु शेष 10 के पास व्यवसायिक कनेक्शन नहीं है। अगर बिजली विभाग का रिकार्ड देखा जाए तो जिले में मात्र 20 हजार 149 व्यवसायिक कनेक्शन ही हैं। जबकि 10 हजार से अधिक ई-रिक्शा चल रहे हैं। साफ जाहिर है कि चोरी की बिजली से उन्हें चार्ज किया जा रहा है। बिजली विभाग इस तरफ आंख मूंदे है। 2021 में जरुर तीन स्थान पर छापा मार कर विभाग ने अवैध रूप से ई-रिक्शा चार्ज होते पकड़े थे। जुर्माना भी वसूला गया था। परंतु फिर पुराने ढर्रे पर काम चलने लगा। 300 रुपये प्रतिदिन ठेके पर मिलता ई-रिक्शा अमरोहा नगर में 4 हजार से अधिक ई-रिक्शा चल रहे हैं। जबकि नगर पालिका के रिकार्ड में मात्र 80 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। शनिवार को की गई पड़ताल में इनके संचालन का एक राज सामने आया। यहां पर कुछ लोगों ने ई-रिक्शा ठेके पर दे दिए हैं। एक चालक ने बताया कि ठेके पर प्रतिदिन 300 रुपये वसूले जाते हैं। टूट-फूट चालक की रहती है। अवैध रूप से हो रही बिक्री भी जिम्मेदार जिले में स्थित 20 से अधिक स्थानों पर ई-रिक्शा की बिक्री होती है। बिक्री भी नियम विरुद्ध की जा रही है। जिले में 60 हजार रुपये से लेकर 1.50 लाख रुपये तक का रिक्शा बेचा जा रहा है। परिवहन विभाग में पंजीकृत ई-रिक्शा का रिकार्ड इसकी बानगी है। क्योंकि वहां पर मात्र 980 ई-रिक्शा ही पंजीकृत हैं। ई-रिक्शा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि जिन लोगों को ई-रिक्शा का पंजीकरण कराना होता है उन्हें 1.50 लाख रुपये तक में पड़ता है। जबकि अवैध रूप से संचालित होने वाले रिक्शा की कीमत 55 हजार रुपये से 70 हजार रुपये है। जनपद में बिजली कनेक्शन की स्थिति- कुल कनेक्शन- 3 लाख 33 हजार 707 घरेलू कनेक्शन- 2 लाख 65 हजार 373 ट्यूबवेल कनेक्शन- 48 हजार 185 व्यवसायिक कनेक्शन- 20 हजार 149 अनुमानित कुल ई-रिक्शा- 10 हजार से अधिक। ई-रिक्शा को व्यवसायिक कनेक्शन से चार्ज करना सही है। घरेलू कनेक्शन से कई ई-रिक्शा चार्ज करना गलत है। 2021 में ऐसे मामले पकड़ में आ चुके हैं। विभाग द्वारा कार्रवाई की गई थी। फिर शहर में अभियान चलाकर चेकिंग की जाएगी। ई-रिक्शा चार्ज करने के लिए बिजली चोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। प्रेमपाल सिंह, एक्सईएन।

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