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अमरोहा: अपनों को बनाया मनरेगा मजदूर, बिना काम दिए लाखों डकारे; जांच बैठी तो सचिव-प्रधान ने छुपाए रिकॉर्ड

Published: Sun, 31 May 2026 06:00 AM (GMT+05:30)

अमरोहा की सिकंदरपुर पंचायत में मनरेगा और विकास कार्यों में लाखों के घोटाले का आरोप है। जांच अधिकारी को प्रधान ...और पढ़ें

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HighLights

  1. दो बार लिखित में मांगे, बावजूद नहीं दिए गए विकास कार्यों के अभिलेख

  2. डीपीआरओ ने पंचायत सचिव पर कार्रवाई की संस्तुति कर डीडीओ को भेजी रिपोर्ट

जागरण संवाददाता, अमरोहा। पंचायत सचिव और प्रधान घपलेबाजियों को छिपाने के लिए पुरजोर कोशिश करते हैं। शिकायत पर अफसरों की ओर से जांच को नामित किए अधिकारियों को अभिलेख तक नहीं देते हैं। ऐसा एक मामला सामने आया है। सिकंदरपुर पंचायत में मनरेगा और विकास कार्यों में घपलेबाजी की जांच के लिए नामित समाज कल्याण अधिकारी पंखुरी जैन प्रधान, पंचायत सचिव और बीडीओ तक को पत्र जारी कर अभिलेख मांग चुकी हैं।

मगर उनको कोई भी अभिलेख नहीं दिया है। जिस कारण जांच तक शुरू नहीं हो पाई है। रिमाइंडर जारी करने के बाद भी अभिलेख नहीं देने पर उन्होंने डीपीआरओ से लिखित शिकायत की है। जिस पर जिला पंचायत राज अधिकारी पारूल सिसौदिया ने पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट डीडीओ को भेज दी है।

नितिन कुमार, रामवीर आदि ग्रामीणों ने तत्कालीन डीएम निधि गुप्ता वत्स को शिकायती पत्र दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि ग्राम प्रधान शकीरा पत्नी युसूफ अली की ओर से मनरेगा के कार्यों में गड़बड़ी की गई है। उन्होंने अपने परिवार के लोगों को मनरेगा मजदूर दर्शाकर बिना काम कराए मजदूरी का भुगतान किया है।

यह भी कहा है कि युनूस और शबाबुल प्रधान पति के भाई हैं। इसरत प्रधान पति का चचेरा भाई है। जानी, इरफान, इरखान, इकबाल, विलेसर गांव के निवासी नहीं हैं। रहमत, अफरोज प्रधान की चचेरी जेठानी हैं। बिना काम कराए उनके खातों में करीब चार लाख रुपये की मजदूरी भेजी गई है। इसके अलावा अन्य विकास कार्यों में भी फर्जीवाड़ा शासकीय धनराशि हड़पने का आरोप लगाया था।

जिस पर डीएम ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को जांच के लिए नामित किया था। एक माह से अधिक समय से समाज कल्याण अधिकारी पंखुरी जैन उसको दबाए बैठी रही थी। लेकिन शिकायतकर्ताओं ने जब सीडीओ एके मिश्र और डीएम डा.नितिन गौड़ से शिकायत की तो वह हरकत में आईं। उन्होंने पंचायत सचिव अभिषेक कुमार व प्रधान को लिखित पत्र देकर अभिलेख तलब किया।

इसके बाद उनको रिमाइंडर भी भेजा। लेकिन कोई भी अभिलेख उन्होंने नहीं दिया। बीडीओ को भी पत्र लिखा, किन्तु अभिलेख नहीं दिए गए। इससे परेशान होकर उन्होंने डीपीआरओ को लिखित पत्र देते हुए शिकायत की। जिस पर उन्होंने संज्ञान लेते हुए पंचायत सचिव पर कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट डीडीओ को भेजने की बात कही है।

 

बार-बार लिखित पत्राचार करने के बाद भी प्रधान, सचिव व बीडीओ ने पंचायत में कराए गए कार्यों से संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए। यह सरासर अनुशासनहीनता है। इससे जिला पंचायत राज अधिकारी को अवगत करा दिया गया है। अब उनके स्तर से ही अगली कार्रवाई होगी।

- पंखुरी जैन, जिला समाज कल्याण अधिकारी

 

जिला समाज कल्याण अधिकारी का पत्र मिला है। जिस पर पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट डीडीओ को भेजी गई है। क्योंकि, वह ग्राम विकास अधिकारी है। डीडीओ स्तर से ही उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जांच के लिए अभिलेख भी प्राप्त करवाए जाएंगे।

- पारूल सिसौदिया, डीपीआरओ।


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