साइबर सेंधमारी: देशभर में हैकर्स का नेटवर्क, व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर 10 हजार में बेचते हैं सरकारी ID-पासवर्ड
अमरोहा में ग्राम पंचायत सचिव की आईडी हैक कर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी करने का बड़ा खुलासा हुआ है। ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
अमरोहा में सचिव की आईडी से 498 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी।
हैकर्स व्हाट्सएप, टेलीग्राम पर सरकारी आईडी-पासवर्ड बेच रहे 5-10 हजार में।
सिद्धार्थनगर में भी 686 प्रमाण पत्र जारी, देशव्यापी नेटवर्क की आशंका।
जागरण संवाददाता, अमरोहा। तोफापुर ग्राम पंचायत सचिव की आइडी हैक कर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी करने का मामला महज साइबर सेंधमारी तक सीमित नहीं लग रहा। इसके पीछे देशभर में फैले ऐसे नेटवर्क की आशंका है, जो हैक की गई सरकारी यूजर आइडी और पासवर्ड वाट्सएप व टेलीग्राम ग्रुप के जरिये पांच से 10 हजार रुपये तक में बेचते हैं।
छह और सात अक्टूबर को 498 प्रमाण पत्र जारी हुए। इन 48 घंटों में औसतन हर पांच से छह मिनट में एक प्रमाण पत्र तैयार हुआ। इतनी तेजी और अलग-अलग राज्यों के लोगों का विवरण दर्ज होने से जालसाजी में काफी लोगों के शामिल होने की आशंका बढ़ जाती है।
नेटवर्क और आइडी हैक करने के तरीके की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। ग्राम सचिव अमरजीत सिंह की ओर से अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। एसपी लखन सिंह यादव ने बताया कि थाना पुलिस के अलावा साइबर सेल को भी जांच में लगाया है। मामले की रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
जानकारों के अनुसार, जन्म प्रमाण पत्र जारी करने वाली सरकारी व्यवस्था में यूजर आइडी और पासवर्ड रजिस्टर्ड मेल पर भेजे जाते हैं। लागइन के दौरान ओटीपी भी पंजीकृत मेल आइडी और मोबाइल नंबर पर आता है। इससे आशंका है कि आरोपितों ने पहले मेल आइडी हैक कर लागइन संबंधी जानकारी ली, फिर ओटीपी का इस्तेमाल कर इतने प्रमाण पत्र जारी किए।
हैरानी यह कि सभी प्रमाण पत्रों में जन्म स्थान तोफापुर गांव दर्शाया गया, जबकि संबंधित लोगों के पते अलग-अलग बताए जा रहे। सभी प्रमाण पत्रों पर ग्राम सचिव अमरजीत सिंह के डिजिटल हस्ताक्षर हुए। हैकर्स आइडी-पासवर्ड अपने नेटवर्क से जुड़े लोगों को भेजते हैं। जानकारों के मुताबिक इनका इस्तेमाल एक से अधिक स्थानों पर भी हो सकता है।
अमरोहा में ही 2022 में जोया की ग्राम पंचायत शेखुपुरा में तत्कालीन सचिव की आइडी का क्लोन बनाने और रहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आइडी हैक हुई थी। इसमें आगरा में बैठे हैकर्स के आइडी-पासवर्ड बेचने की जानकारी सामने आई थी। जिलाधिकारी डा.नितिन गौड़ ने बताया कि प्रशासन संबंधित राज्यों को भी जारी प्रमाण पत्रों का ब्योरा भेजने की तैयारी में है।
इन राज्यों व जिलों के बनाए प्रमाण पत्र :
प्रदेश के चंदौली, फर्रुखाबाद, कानपुर देहात, सिद्धार्थनगर, बलिया और प्रतापगढ़ के लोगों के नाम से 270 जन्म प्रमाण पत्र जारी हुए। वहीं बिहार के 72, झारखंड के 53, हरियाणा के 17, बंगाल और कर्नाटक के 15-15, महाराष्ट्र के 13, मध्य प्रदेश के नौ, असम के आठ, पंजाब के सात, हिमाचल प्रदेश के छह, दिल्ली के चार, तेलंगाना के तीन, राजस्थान और उत्तराखंड के दो-दो तथा सिक्किम और आंध्र प्रदेश के एक-एक प्रमाण पत्र हैं।
सचिव की आइडी से नौ माह में बने 686 जन्म प्रमाणपत्र, मुकदमा
सिद्धार्थनगर : देश के 17 राज्यों में 498 लोगों के फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी होने की कड़ी सिद्धार्थनगर से भी जुड़ गई है। खेसरहा ब्लाक के ग्राम विकास अधिकारी विशाल सोनकर का मोबाइल फोन गायब होने के बावजूद उनकी आइडी से प्रमाण पत्र जारी होते रहे। ब्लाक की तीन ग्राम पंचायतों में नौ माह के भीतर सचिव की आइडी से 686 जन्म प्रमाणपत्र जारी हुए। इसमें कितने फर्जी हैं, इसकी जांच चल रही है।
ग्राम विकास अधिकारी विशाल सोनकर के अनुसार दो मई को मोबाइल फोन गायब होने के बाद वह पिता के फोन में दूसरा सिम डालकर प्रमाणपत्र जारी कर रहे थे। मोबाइल गायब होने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी, लेकिन उनकी आइडी से प्रमाणपत्र जारी होते रहे। सीआरएस पोर्टल के अभिलेखों के अनुसार, एक जनवरी से 28 सितंबर तक मदरहना ग्राम पंचायत में 161, बकैनिहा में 259 और केशवार में 266 जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए।
मोबाइल फोन गायब होने के कारण वह यह नहीं बता सकते कि इस दौरान उनकी आइडी का दुरुपयोग कर कितने प्रमाणपत्र जारी किए गए। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से पत्र मिलने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी ने सचिव को फर्जी प्रमाणपत्र जारी होने के संबंध में मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया।
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जिला पंचायत राज अधिकारी वाचस्पति झा ने बताया कि शुक्रवार को एडीओ पंचायत को चेतावनी दी गई कि सचिव मुकदमा नहीं दर्ज कराते हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई कराई जाए। इसके बाद तहरीर दी गई। अब जांच से प्रमाणपत्रों में अनियमितता और आइडी के दुरुपयोग की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
