कागजों में बह रही ढक्का नहर! 21 मकान जमींदोज हुए तो खुला 40 km लंबी 'गायब' नहर का राज
अमरोहा में ढक्का नहर केवल कागजों में मौजूद है, जिसका अस्तित्व अतिक्रमण के कारण समाप्त हो गया है। 21 मकानों ...और पढ़ें

ढक्का गांव में मकान को तोड़ता बुलडोजर व लगी भीड़ फाइल फोटो
HighLights
बाढ़ खंड विभाग नक्शा व अभिलेख खंगालने में जुटा
बिजनौर से बताया जा रहा ढक्का नहर का उद्गम
जागरण संवाददाता, अमरोहा। जनपद की नदियों के बाद नहर भी धरातल से लापता हैं। उनका अस्तित्व खत्म हो चुका है लेकिन, कागजों में नाम लगातार जिंदा है। ऐसी ही नहर है ढक्का नहर। जिसका वजूद पूरी तरह समाप्त है। लोगों ने अतिक्रमण कर उसका नामोनिशान मिटा दिया है। हसनपुर तहसील के ढक्का गांव में 21 मकान ध्वस्त होने के बाद अचानक यह नजर चर्चा में आई है।
इस घटना के बाद अधिकारी उसका नक्शा व अभिलेख खंगालने की कार्रवाई में जुट गए हैं। बाढ़ खंड कार्यालय मुरादाबाद में उसको तलाशा जा रहा है। लेखपालों से भी अधिकारी संपर्क कर जानकारी जुटा रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि अधिकारी अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि उसका उद्गम कहां से हुआ है।
पखवाड़ा पहले हसनपुर तहसील क्षेत्र के गांव ढक्का में प्रशासन द्वारा 21 मकानों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई थी। उस समय बताया गया था कि मकान ढक्का नहर की जमीन पर कब्जा कर बनाए गए हैं। यह जमीन ग्राम समाज की है। किसी की निजी नहीं है। हालांकि प्रशासन की इस कार्रवाई से ढक्का नहर का मामला उजागर हो गया।
इसके बाद से अन्य लोगों में भी खलबली मची हुई है। ढक्का नहर बिजनौर जनपद से निकलना बताया जा रहा है। गजरौला, हसनपुर व गंगेश्वरी ब्लाक क्षेत्र के गांवों से निकलते हुए बदायूं तक नहर का निकलना माना जा रहा है। ताज्जुब की बात ये है कि इस नहर का अस्तित्व खत्म है।
कुछ गांवों में उसकी जमीन छूटी है तो अन्य में कब्जा कर मकान बना लिये गए हैं या खेतीबाड़ी हो रही है। करीब 40 किलो मीटर उसकी जनपद में लंबाई का अनुमान बताया जा रहा है।
राजस्व रिकार्ड में होने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन, जिस विभाग के ऊपर उसके रख-रखाव, साफ-सफाई की जिम्मेदारी है, वह पूरी तरह बेखबर है। मकान ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद से बाढ़ खंड विभाग के अधिकारी नहर का नक्शा, अभिलेख आदि जुटाने की कार्रवाई में लगे हुए हैं। लेकिन, अभी तक उनको कोई सफलता नहीं मिली है।
ढक्का नहर से संबंधित कोई अभिलेख विभाग के पास नहीं है। तहसीलों में ही राजस्व रिकार्ड में होगा। उसके बारे में पता लगाया जा रहा है। हसनपुर व मंडी धनौरा तहसील के लेखपालों से भी बातचीत की गई है। कहां से नहर निकल रही है और वास्तविक स्थिति क्या है, पूरा शिजरा निकलवाया जा रहा है।
- मुकेश जैन, एई, बाढ़ खंड विभाग
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