किसान ने चुका दिया कर्ज, फिर भी बैंक रिकॉर्ड में रहा बकाया; अमरोहा के इस बड़े घोटाले की पूरी कहानी
अमरोहा के चुचैला कलां में लाखों का सहकारी घोटाला! 300 किसानों के खातों में हेराफेरी कर तत्कालीन मैनेजर, सचिव और ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
तत्कालीन सहकारी समिति सचिव अमित कुमार को एआर कोआपरेटिव ने किया निलंबित
पिछले चार साल का जांच कमेटी ने खंगाला रिकार्ड, 300 किसानों के खातों की हुई पड़ताल
जागरण संवाददाता, अमरोहा। चुचैला कलां बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति में हुए लाखों के घोटाले की जांच में जिला सहकारी बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक पंकज कुमार व चार कैशियर के अलावा तत्कालीन समिति सचिव अमित कुमार समेत आठ कर्मचारी फंस गए हैं।
जांच कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद एआर कोआपरेटिव ने मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से तत्कालीन सचिव को निलंबित कर दिया है जबकि, समिति के दो लेखाकार पहले ही मामले में सस्पेंड किए जा चुके हैं। बैंक कर्मचारियों पर कार्रवाई मुरादाबाद डीआर सहकारिता द्वारा की जाएगी। उनको रिपोर्ट भेज दी गई है।
वर्ष 2025 में सामने आया था घोटाला
सितंबर 2025 में चुचैला कलां समिति में लाखों रुपये का घोटाला सामने आया था। किसानों की शिकायत पर अनंतिम जांच में घोटाले की पुष्टि हुई थी। यहां बता दें कि इस समिति से दो हजार से अधिक किसान सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं। अनंतिम जांच अपर जिला सहकारी अधिकारी उमेश कुमार व एडीओ राजकुमार ने की थी और अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी थी।
जांच समिति की रिपोर्ट पर एआर कोआपरेटिव ने दो लेखाकार विपिन कुमार व संजीव कुमार को दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अंतिम जांच के लिए चार सदस्य कमेटी गठित की थी। यह कमेटी अपर जिला सहकारी अधिकारी की अध्यक्षता में बनाई गई थी। कंप्यूटर से संबंधित रिकार्ड की जांच के लिए अलग से तकनीकी कर्मचारी को सहयोग के लिए लगाया था।
चार साल तक खंगाला रिकार्ड
कमेटी ने सहकारी समिति और जिला सहकारी बैंक में पिछले चार साल तक का रिकार्ड खंगाला। जिसमें बड़ा घोटाला सामने आया है। कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट एआर कोआपरेटिव को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक- जांच में कमेटी ने 300 किसानों के ऋण खातों का परीक्षण किया। जिसमें पता चला कि किसानों ने धनराशि समिति में जमा की है और कर्मचारियों ने उनको रसीद भी दी है।
लेकिन, यह धनराशि कर्मचारियों ने पूरी जमा नहीं की। किसान का ऋण कागजों में बराबर चलता रहा। तमाम अभिलेखों पर ओवर राइटिंग मिली है। इस मामले में कमेटी ने बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक, तत्कालीन चार कैशियर के अलावा समिति के तत्कालीन सचिव व समिति के समस्त स्टाफ को दोषी माना है।
यह था पूरा मामला
चुचैला कलां सहकारी समिति के कर्मचारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया। एक किसान के नाम से दो-दो चेक जारी कर लाखों रुपये का भुगतान हासिल किया। किसानों से कुछ धनराशि जमा कराकर डिस्चार्ज की रिपोर्ट तक दे दी। किसान समिति का कर्जदार रहा। लेकिन उसकी तहसील में बंधक जमीन मुक्त हो गई। फर्द पर ऋण मुक्त अंकित हो गया।
किसानों ने समिति से लिए ऋण का भुगतान कर दिया है, जिनके पास उनकी रसीदें हैं। यह धनराशि कर्मचारियों ने बैंक में जमा नहीं की गई। बैंक के पास भी रसीद नहीं है। इस घपलेबाजी का पर्दाफाश तब हुआ जब किसानों ने उच्चाधिकारियों को ऋण जमा करने की रसीद दिखाई।
इसके साथ ही उन्होंने बड़े घोटाले की आशंका जताते हुए मुरादाबाद स्थित डीआर सहकारिता वीर विक्रम से शिकायत कर जांच की मांग की। जिस पर डीआर सहकारिता ने घपलेबाजी की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी गठित की थी।
मामले की जांच रिपोर्ट मिल गई है। जिसके आधार पर तत्कालीन समिति सचिव अमित कुमार को निलंबित कर दिया गया है जबकि, दो लेखाकार पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं। बैंक कर्मचारियों पर कार्रवाई मुरादाबाद डीआर कार्यालय जांच रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। अब उत्तर प्रदेश सहकारिता अधिनियम की धारा 68 -1 के तहत एडीओ व एडीसीओ को जांच के लिए नामित किया गया है। उनके द्वारा कर्मियों को नोटिस जारी कर सुनवाई का मौका दिया जाएगा। इसके बाद अगली कार्रवाई होगी।
- वरुण अग्रवाल, एआर कोआपरेटिव।
यह भी पढ़ें- नपेंगे घोटालेबाज: अमरोहा कोऑपरेटिव स्कैम की फाइनल रिपोर्ट तैयार, इन कर्मचारियों पर लटकी तलवार
