अमेठी: 'रोशन करेगा बेटा तो बस एक ही कुल को, दो कुलों की लाज होती हैं बेटियां। कोई नहीं एक दूसरे से कम हीरा अगर है बेटा तो सच्चा मोती होती हैं बेटियां' इन पंक्तियों को चरितार्थ कर रही हैं क्षेत्र की अंजू। घर से लेकर गांव व क्षेत्र की महिलाओं को जागरूक करना, सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी देना, गांव की निरक्षर महिलाओं को साक्षर बनाने पहल करने में वह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं।

रामपाटी अमयेमाफी भेटुआ निवासी अंजू पाल एक कृषक परिवार में जन्मीं पांच बहनों में तीसरे नंबर पर हैं। बचपन से ही आर्थिक तंगी को देखते हुए उन्होंने बेटे का फर्ज निभाया और पिता का हाथ बंटाना शुरू किया।

वहीं, शिक्षा दीक्षा के साथ सामाजिक कार्यो में रुचि रखने वाली अंजू ने गांव की बेटियों व क्षेत्र की महिलाओं को निश्शुल्क शिक्षा देना शुरू कर दिया। सरकार की योजनाओं के बारे में भी महिलाओं को जागरूक करने लगी। मिशन शक्ति के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं साक्षर बनाने के लिए गांव-गांव मुहिम चला रही हैं।

कोरोना संक्रमण में लोगों की मदद करने में रहीं आगे

लाकडाउन में जहां लोग घरों से निकलने से परहेज कर रहे थे, वहीं जान की परवाह किए बगैर वह लोगों को जरूरी सामग्री मुहैया करा रहीं थीं। असहाय महिलाओं को खासकर दवाई, राशन व अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई। निरक्षर महिलाओं को कोरोना वायरस के बारे में जागरूक किया। शारीरिक दूरी का पालन करने का तरीका भी समझाया। इसके साथ ही मास्क की जगह दुपट्टा व धोती के पल्लू से मुंह ढकने के तरीके भी सिखाए। अंजू को मिशन शक्ति में उत्कृष्ट योगदान के लिए कई संस्थाएं सम्मानित भी कर चुकी हैं।

Edited By: Jagran