सिंहपुर (अमेठी) : सिंहपुर की पाच बड़ी ग्राम पंचायतों में शुमार फूला गांव का नाम भी शामिल है। यह वहीं गाव है, जो 2014 के आम चुनाव में वोटिंग वाले दिन स्थानीय सासद का विरोध कर वापस भेज सुर्खियों में आया था। एक बार फि र लोकसभा चुनाव को लेकर गली, कूचे और चाय-पान की दुकानों पर सियासी चर्चाएं खासो आम हैं।

बदले सियासी माहौल में हमारी टीम ने मतदाताओं की नब्ज टटोलने के लिए फू ला गाव का रुख किया। यहा सड़क किनारे बरामदे में एक बुजुर्ग हाथ में दैनिक जागरण अखबार पढ़ते दिखे। उनके ठीक बगल में कुछ लोग चुनावी चर्चा में व्यस्त रहे। बरामदे के कोने में कृष्णा देवी की चाय की दुकान भी है। मौसम में रूहानी ठंड थी, लेकिन सियासी तापमान अपनी चरम पर रहा। समाचार पत्र से अलग होते हुए सूर्य भान सिंह कहने लगे पार्टी कौनो खराब नहीं न केवल वंशवाद खराब है। यहिसे पहिले बड़े बड़े घोटाला भें, लेकिन देश के प्रधानमंत्री का कोउ चोर नहीं कहिस। लीडर का सम्हार कै बात करै का चही। तभी भरत मिश्र उनकी वंशवाद वाली बात का उत्तर देते हुए बोले महतारी बाप कै उत्तराधिकारी बेटवै तौ हुअत हैं। इसी बीच बुजुर्ग रामकल्प कहने लगे 70 साल से देखा का किहिन अबकी तौ घरन घरन लैट्रिन बनी, सबका कालोनी मिली। दुई दुई हजार रुपिया मिले औ उई पूछत हैं स्ट्राइक कहा भय। धनंजय सिंह पूछने लगे साढे़ तीन क्विंटल विस्फ ोटक कहां से आवा कसक कै चौकीदारी आय। अरुण त्रिवेदी किसानों का मुद्दा उठाते हुए कहते हैं साल भर मा डीएपी कै रेट पाच सौ रुपया बढि़गा। जवान औ किसान कै तौ बात करब बेमानी है। इस बात के समर्थन में सबकी तालिया बज उठी। तब तक सूर्यभान यह कहते हुए चले गए कि अब हमरे क्षमता नहीं न। शेर बहादुर ने कहा जब उई अमेठी का आपन घर मानत हैं तौ दुई जगह से पर्चा काहे भरिन, जवाब देते हुए धनंजय ने कहा लोकतंत्र आय चहै तीन जगह से भरै यहिमा कउन दिक्कत। चर्चा में अनिल जायसवाल, प्रकाश, राम अवतार, मुन्ना सिह, संतोष सिंह, राजकरन ने भी अपने-अपने विचार रखे। अंत में 70 वर्षीय बुजुर्ग दुर्गाबक्स सिंह ने यह कहते हुए बात समाप्त कर दी कि कहते हैं करते नहीं झूठे बड़े लवाब, एक दिन हाजिर होवोगे साहब के दरबार।

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