BJP की नई टीम में स्मृति ईरानी को क्यों मिला बड़ा पद? सामने आई वजह, पार्टी के इस दांव के मायने भी बड़े
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को भाजपा का राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है, जिसके राजनीति में बड़े मायने हैं।

HighLights
स्मृति ईरानी को भाजपा का राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया।
यह राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा की रणनीति का हिस्सा।
अमेठी, रायबरेली, सुलतानपुर में भाजपा को मिलेगी मजबूती।
दिलीप सिंह, अमेठी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की बढ़ती सक्रियता, जेन-जी आंदोलन के बाद बदले हुए हालत में एक बार फिर पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। इस पद व बदलाव के राजनीति में बड़े मायने हैं।
लंबे समय तक राहुल गांधी को अमेठी में घेर कर रखने वाली स्मृति को भाजपा ने ऐसे समय में अपना महामंत्री बनाया है। जब राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह पर सीधे तौर पर हमलावर हैं।
तमाम प्रयास के बावजूद भाजपा को कोई भी नेता स्मृति ईरानी की तरह राहुल गांधी व उनके परिवार को जवाब देता नहीं दिखा। ऐसे में स्मृति को महामंत्री बनाए जाने के साथ एक बात तो साफ हो गई है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस व भाजपा के बीच बड़ी राजनीतिक लड़ाई का मैदान एक बार फिर अमेठी-रायबरेली बनने वाला है।
स्मृति को जानने वाले यह भी जानते हैं कि भाजपा में वहीं एक ऐसी नेता हैं जो राहुल गांधी को उन्हीं की भाषा व अंदाज में दो-दो हाथ करने से एक कदम भी पीछे नहीं हटती हैं। इसके लिए कई बार उन्हें आलोचना तक शिकार होना पड़ा है।
स्मृति ने अमेठी-रायबरेली की राजनीति में कांग्रेस को उलझाया
भाजपा ने स्मृति ईरानी को 2014 में राहुल गांधी के मुकाबले अमेठी के चुनावी मैदान में उतरा तो स्मृति ने राहुल व गांधी व उनके परिवार को घर में ही घेरकर रखने की रणनीति पर कुछ ऐसा काम किया कि पूरा गांधी परिवार अमेठी-रायबरेली की राजनीति में उलझकर रह गया, जिसका लाभ भाजपा को पूरे देश में मिला। भाजपा ने समय-समय पर स्मृति ईरानी को उनकी मेहनत का इनाम भी दिया। 2014 में हारने के बाद स्मृति बड़ी मंत्री बनी और अब पार्टी ने उन्हें संगठन में बड़ा ओहदा दिया है।
आम चुनाव 2019 में राहुल गांधी की हार के बाद कांग्रेस ने मजबूत रणनीति के साथ धरातल पर अपनी पकड़ मजबूत की और आम चुनाव 2024 में केएल शर्मा ने स्मृति ईरानी को हराकर जीत दर्ज की ताे कांग्रेस ने इसे राहुल गांधी के हार का बदला बताया और यह प्रचारित करने का प्रयास किया कि अब अमेठी में स्मृति ईरानी के दिन पूरे हो गए हैं।
चुनाव हराने के बाद स्मृति के अमेठी आने-जाने में कमी आई तो कांग्रेस के साथ भाजपा का एक वर्ग इस बात को सही मान बैठा था। ऐसे समय में स्मृति की बढ़ी सक्रियता और अब राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने की घोषणा ने कांग्रेस के साथ भाजपा के नेताओं की बैचेनी बढ़ा दी है।
अमेठी के साथ रायबरेली व सुलतानपुर में भाजपा को मिलेगी मजबूती
आम चुनाव 2024 में हार के बाद कांग्रेस की सक्रियता को कम करने के लिए और 2027 विधान सभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए भाजपा ने भी धरातल पर काम करना शुरू कर दिया। पांच विधान सभा क्षेत्रों वाली अमेठी संसदीय सीट की सलोन सुरक्षित विधान सभा क्षेत्र रायबरेली का हिस्सा है तो जगदीशपुर विधान सभा का हलियापुर क्षेत्र सुलतानपुर का भूभाग है।
ऐसे में अमेठी से ही स्मृति रायबरेली व सुलतानपुर पर भी फोकस रख सकती हैं। 2014 से लेकर 2024 तक अमेठी में स्मृति ने गांव-गांव, घर-घर लोगों को भाजपा से जोड़ने का काम किया है।
आम चुनाव 2024 में वह चुनाव भले ही हार गईं हो पर उनका इन तीनों जिलों में ठीक-ठाक प्रभाव है। इसी प्रभाव को भाजपा 2027 के चुनाव में हथियार बनाकर चुनावी जंग जीतने की तैयारी में है। इन जिलाें के संगठन पर भी स्मृति का अच्छा प्रभाव है।
दीदी स्मृति को राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने से अमेठी के कार्यकर्ताओं के साथ ही आम जनमानस भी खुश है। दीदी के अनुभव, संगठनात्मक कौशल और समर्पण से पार्टी को नई ऊर्जा एवं मजबूती मिलेगी।
-सुधांशु शुक्ला, जिलाध्यक्ष, भाजपा
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