अमेठी, जेएनएन। लोकसभा चुनाव 2019 में अपना गढ़ अमेठी गंवाने वाले राहुल गांधी कल पहली बार अमेठी पहुंचे। बंद कमरे में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम आसान है। इसमें बहुत मजा आता है। आप लोग इस काम में लगे रहें।

कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद स्वीकार होने का इंतजार कर रहे राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं से कहा कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, योगी आदित्यनाथ जी मुख्यमंत्री और भाजपा की यहां सांसद हैं। हमें विपक्ष का काम करना है। आप जानते हो कि विपक्ष का काम करने में सबसे ज्यादा मजा आता है। यह काम आसान होता है। अब आपको अमेठी में विपक्ष का काम करना है। जो जनता की जरूरतें हैं, उनको लेकर आवाज उठानी है। यहां की जनता की मदद करनी है। आप लोग अर्थव्यवस्था की हालत जानते हैं, रोजगार की हालत आप जानते हो, भ्रष्टाचार कहां हो रहा है। कौन कर रहा है आप जानते हो। मुद्दों की कोई कमी नहीं है। अमेठी की जनता से कांग्रेस कार्यकर्ता को जुडऩे की जरूरत है।

अमेठी लोकसभा सीट से हाल में मिली पराजय के बाद पहली बार यहां पहुंचे राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ समीक्षा बैठक में कहा कि अमेठी उनका घर है और वह इसका दामन कभी नहीं छोड़ेंगे। बैठक में शामिल युवक कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नदीम अशरफ जायसी के मुताबिक राहुल ने कहा कि अमेठी मेरा घर-परिवार है। मैं अमेठी नहीं छोडूंगा. मैं और (कांग्रेस महासचिव) प्रियंका गांधी यहां आते रहेंगे। यहां पर अमेठी का विकास बाधित नहीं होने दिया जाएगा। मैं केरल के वायनाड का सांसद हूं मगर अमेठी से हमारा तीन पीढिय़ों का रिश्ता है। मैं दिल्ली में ही अमेठी की लड़ाई लड़ता रहूंगा।

राहुल गांधी ने कहा कि अमेठी में लोकसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं ने काम किया पर स्थानीय नेता जनता से दूर रहे। इसी वजह से यहां उनकी हार हुई। चुनाव में हार और जीत होती रहती है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। आप लोग जनता से जुड़ें, सब ठीक हो जायेगा। राहुल गांधी ने कल पार्टी पदाधिकारियों के साथ गहन मंथन किया और कार्यकर्ताओं की बातें बेहद संजीदगी से सुनीं।

बैठक में कल कांग्रेस के जिला से लेकर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं ने अपनी बात राहुल के सामने रखी। यहां अधिकतर कार्यकर्ताओ ने संगठन की कमजोरी और प्रशासन पर धांधली का आरोप लगया। कई नेताओं ने कांग्रेस सेवादल, युवक कांग्रेस, महिला कांग्रेस, एनएसयूआई सहित कांग्रेस के अनुषंगिक संगठनों की घोर उपेक्षा को भी हार का बड़ा कारण बताया। कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि यहां कांग्रेस संगठन कुछ लोगों तक सीमित हो गया और पूरे जिले में कांग्रेस को कमजोर कर दिया गया है। चुनाव में रणनीति के अभाव में पार्टी का प्रचार नहीं हुआ। कई कार्यकर्ताओं ने पार्टी के स्थानीय नेताओं पर भाजपा से मिलीभगत की शिकायत भी की।

न शिकवा न शिकायत, बस हर पल साथ देने का किया वादा

लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की हार के बाद हतोत्साहित कांग्रेसियों के कल का दिन उर्जा भरने वाला रहा। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी बदले हुए माहौल में कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे तो सब चुप थे। न कोई शिकवा न ही शिकायत बस अमेठी से रिश्तों की हुई बात। राहुल ने भी पीढिय़ों के रिश्ते ही बात कही तो कार्यकर्ताओं ने भी उनके हां में हां मिलाते हुए भावनात्मक रिश्ते के पुरानी डोर को नई मजबूती देने की कोशिश की। राहुल गांधी ने कांग्रेसियों को संजीवनी देने के साथ मन में उत्साह भरने की कोशिश करते हुए कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि आप सब एक बार फिर पूरे मन से जनता के बीच जाएंगे। राहुल गांधी ने अमेठी से ही पारिवारिक संबंध होने की बात भी दोहराई। राहुल ने अमेठी में टूट रही कांग्रेस में एक सिरे से जोड़ दिया है।

एक स्वर से इस्तीफा वापस लेने की मांग

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कल एक स्वर में राहुल गांधी से अपना त्यागपत्र वापस लेने की गुजारिश की। गौरीगंज के निर्मला शैक्षिक संस्थान में कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए अचानक राहुल भावुक हो उठे। राहुल गांधी ने कहा कि वह पिछले पंद्रह साल से अमेठी के सांसद थे जो प्रेम अमेठी व आप लोगों से मिला है उसे वह भूल नहीं सकते हैं। यहां से रिश्ता खत्म हो ही नहीं सकता है।

इतना कहते हुए उनका गला भर आया और चुप हो गए। कई कार्यकर्ताओं ने राहुल को भावुक देख उनकी आंखे नम हो गई और कुछ देर तक कार्यकर्ताओं में शांति छा गई। दोबारा कार्यकर्ताओं ने पूरे उत्साह से भइया हम साथ हैं कहा तो जोश बढ़ उठा। अमेठी के बदले राजनैतिक स्वरूप में आयोजित राहुल की इस समीक्षा बैठक में जिला कांग्रेस कमेटी, सभी अनुषंगिक संगठनों के पदाधिकारी, पार्टी की सभी ब्लॉक तथा बूथ इकाइयों के पदाधिकारी भी शामिल थे। बैठक को महज 50 मिनट में समाप्त करने के बाद राहुल रायबरेली जिले के छतोह ब्लॉक स्थित दो गांवों का दौरा करने रवाना हो गये।

कार्यकर्ताओं में टकराव, एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी

राहुल गांधी की अमेठी में मौजूदगी के बीच कल एक बार फिर कांग्रेस के कार्यकर्ता आपस में टकराते दिखे। संवाद कार्यक्रम के बाहर कार्यकर्ताओं ने अंदर न जा पाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि कुछ लोग अमेठी में राहुल गांधी व कांग्रेस को मजबूत नहीं करना चाहते। इसी के चलते यहां पर इस बार कांग्रेस की यह हालत हुई है।

अमेठी से गांधी-नेहरू परिवार का बरसों पुराना रिश्ता

अमेठी में गांधी-नेहरू परिवार से पुराना रिश्ता रहा है। वर्ष 1976 में अमेठी से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले संजय गांधी ने 1977 में पहली बार चुनाव लड़े और हार का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके उन्होंने क्षेत्र नहीं छोड़ा और सक्रिय रहे। तीन साल बाद वर्ष 1980 में फि र चुनाव हुआ तो भारी बहुमत से विजयी हुए। वर्ष 2019 में एक बार फिर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। जनता के बीच राहुल गांधी अमेठी फि र से आएंगे या नहीं इस पर चर्चाएं भी काफी हो रही थी। 

Posted By: Dharmendra Pandey